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आदित्यपुर थाना में न्याय के लिए युवती का अवाज उठाना पड़ गया महंगा, नौकरी से धोना पड़ा हाथ, एएसआई राजीव कुमार पर गंभीर आरोप लगने के बाद भी विभागीय नहीं हुईं जाँच, विभागीय विधि व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवाल

BySubhasish Kumar

Oct 6, 2023

आदित्यपुर : बीते कई दिनों से आदित्यपुर थाना चर्चा का विषय बन चुका हैं. जहाँ एक युवती के आरोप के बाद भी एएसआई राजीव कुमार पर नहीं होती हैं जाँच. देश में हर जगह महिला सशक्तिकरण की बात होती हैं मगर कुछ जगहों पर महिला को प्राथमिकता नहीं दी जाती हैं.
बीते कुछ दिनों पहले युवती द्वारा आदित्यपुर थाना में एक शिकायत दर्ज कराई गयी थीं. लिखित शिकायत में युवती द्वारा आरोप लगाया गया था कि नितेश चंदा नामक युवक ने शादी का झांसा देकर यौन शोषण किया एवं जाति सूचक गली गलौज भी किया था. जिसमें युवती कई दिनों तक थाने के चक्कर भी काटी और कई घंटे तक थाने में केस दर्ज कराने के लिए इंतजार भी किया था. फिर कुछ दिनों बाद मीडिया में खबर प्रकाशित होते ही युवती द्वारा लिखित शिकायत पर केस दर्ज भी किया गया. जिसमें युवती द्वारा एक गंभीर आरोप लगाया गया था कि ए एस आई राजीव कुमार जांच के नाम पर रात 12:00 से लेकर सुबह 4:00 बजे तक फोन में बातें करते थें.जिसमें वीडियो कालिंग पर बाते करने को भी कहते थें. जिसमें ए एस आई राजीव कुमार द्वारा थाने से बार-बार केस उठाने की भी बातें कही गई थी. मगर आज तक विभाग द्वारा एएसआई राजीव कुमार पर जाँच बैठाई नहीं गई. परंतु उक्त युवती को अपनी नौकरी से ही हाथ धोना पड़ा .यह किस तरह का जाँच युवती को आधी रात में कॉल किया जाता था.

युवती जिस कंपनी में कार्य करती थी उस कंपनी का नाम आईटी साइंट है. जिसमें काम करके अपनी जिंदगी का गुजारा करती थी और इसी वेतन से अपनी माता और भाई का खर्चा उठती थी. परंतु कंपनी ने यह कहते हुए युवती को नौकरी से हटाया कि आपने मीडिया के सामने कंपनी का नाम लिया है जिसके लिए आपको कंपनी से हटा दिया गया है. अब बताइए यह किस तरह का नया कानूनी है युवती अपनी हक़ की लड़ाई भी नहीं लड़ सकती हैं. युवती को प्रतिदिन मानसिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ रहा है.

युवती ने बताया कि कई दिन पहले ही पुलिस से शिकायत की गई थी लेकिन पुलिस द्वारा इस संबंध में जांच नहीं किया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगा है कि जब भी मैं थाने में आती थी तो इसकी सूचना लड़का को मिल जाती थी और लड़के द्वारा अलग तरह का प्रलोभन दिया जाता था मगर उसे थाने में बुलाकर जांच नहीं किया जाता था . युवती परेशान होकर दर दर भटकती रहती थीं. फिलहाल युवती का केस दर्ज हों गया हैं लेकिन जो अर्चनों का सामना करना पड़ रहा था. उस पर विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई.

क्या पूरा सिस्टम युवती को न्याय दिलाने में असमर्थ हैं?

क्या युवती को अपने हक के लिए अवाज उठाना महंगा पड़ गया?

क्या एएसआई राजीव कुमार द्वारा आधी रात में जाँच के नाम पर कॉल करना सही हैं ? 

युवती को न्याय दिलाने में प्रशासनिक विधि व्यवस्था फेल हो रही है क्या?

न्याय के लिए आवाज उठाने से युवती की नौकरी चली जाती है क्या यह समाज के लिए सही है?

ऐसे बहुत सारे सवाल समाज में उठ रहे हैं जो विभागीय विधि व्यवस्था का कमजोरी को दर्शा रहे हैं.


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