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आदित्यपुर स्थित मेडिट्रिना सुपर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल ने बनाया कीर्तिमान, महिला के नशो का किया सफल एंजियोप्लास्टी, इस तरह के जटिल ऑपरेशन करने वाला झारखंड का बना पहला अस्पताल पीड़ित महिला पूर्ण रूप से स्वस्थ; डॉक्टरों ने बताया आगे भी मेडिट्रिन अस्पताल मरीजों की इसी तरह करता रहेगा सेवा

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BySubhasish Kumar

Aug 20, 2024

आदित्यपुर : सरायकेला के आदित्यपुर स्थित मेडिट्रिना सुपर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल ने बनाया कीर्तिमान

महिला के ब्रेन का किया सफल एंजियोप्लास्टी, इस तरह के जटिल ऑपरेशन करने वाला झारखंड का बना पहला अस्पताल

पीड़ित महिला पूर्ण रूप से स्वस्थ; डॉक्टरों ने बताया आगे भी मेडिट्रिन अस्पताल मरीजों की इसी तरह करता रहेगा सेवा

हार्ट ब्लॉकेज के मामले में एनजीओप्लास्टी कर ब्लॉकेज खोलना आम बात है, मगर यदि किसी के ब्रेन का नस ब्लॉक हो जाए तो उसे बचा पाना बेहद ही कठिन है. ऐसे रोगियों की याददाश्त चली जाती है और पैरालिसिस का खतरा बढ़ जाता है. झारखंड जैसे राज्य में जहां अभी भी चिकित्सा जगत काफी पिछड़ा हुआ है, उस राज्य में इस तरह के रोगी का सफल इलाज यह दर्शाता है कि झारखंड भी मेडिकल क्षेत्र में तरक्की के पथ पर अग्रसर है. यह कारनामा कर दिखाया है सरायकेला के आदित्यपुर स्थित मेडिट्रीना सुपर मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल ने. जहां एक महिला के ब्रेन के सूख चुके नस का अस्पताल के डॉक्टरों ने सफल एंजियोप्लास्टी कर महिला को नया जीवनदान दिया है. आपको बता दें कि जमशेदपुर के टेल्को की रहने वाली 54 वर्षीय महिला पी लता के ब्रेन के नस में ब्लॉकेज की शिकायत पर उन्हें मेडिट्रीना अस्पताल में भर्ती कराया गया था. यहां डॉक्टर पार्थो पी चौधरी की टीम ने महिला के ब्रेन के ब्लॉकेज का सफल एंजियोप्लास्टी कर महिला को नया जीवनदान दिया है. आज महिला पूरी तरह से स्वस्थ है. उन्होंने अस्पताल के सभी डॉक्टरों का आभार जताया है. इस संबंध में महिला का इलाज कर रहे डॉक्टर पार्थो पी चौधरी ने बताया कि महिला का ब्रेन पैरालाइज्ड हो रहा था. उनके ब्रेन का नस सूख चुका था. पहली बार एंजियोप्लास्टी कर ब्लॉकेज खोला गया है जो काफी जटिल काम था, मगर मेडिट्रीना अस्पताल शुरू से ही ऐसे जटिल रोगों के इलाज के लिए जाना जाता है. इससे पूर्व भी अस्पताल में कई जटिल रोगों का इलाज सफलतापूर्वक किया गया है. इस तरह का यह पहला सर्जरी था जो सफल रहा. उन्होंने बताया कि इस तरह के सर्जरी में पांच से छः लाख रुपए तक के खर्च आते हैं मगर इस अस्पताल में मात्र तीन लाख का खर्च आया. बता दें कि इस बीमारी में आमतौर पर रोगी की याददाश्त चली जाती है और पैरालिसिस का खतरा बढ़ जाता हैं


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