
सरायकेला : चांडिल डैम के जलस्तर में बीती रात से मामूली गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन किसानों की चिंता अभी भी बरकरार है। गुरुवार रात 10 बजे डैम का जलस्तर 181.09 मीटर RL था, जो शुक्रवार सुबह 6 बजे घटकर 180.98 मीटर RL पर आ गया। 8 घंटे में 11 सेंटीमीटर की कमी आई है, लेकिन खेतों में घुसा पानी अभी भी नहीं निकला है।
बताया जा रहा है कि पानी धीरे-धीरे उतर रहा है, मगर खेतों में 2 से 3 फीट पानी जमा रहने से धान की फसल सड़ने का खतरा बढ़ गया है।

*40 गांवों के किसान प्रभावित*

प्रभावित क्षेत्रों में कुकड़ू प्रखंड के बांदाबीर, केंदाआन्दा, आदारडीह, चौका, कारकीडीह, चानो, चोराटखाल, नीमडीह के हुटू, आंडा, तिलाईटांड़, कल्याणपुर, लावा, सीमा, चांडिल के रसुनिया, हाथीनादा, रूयानी, पियालडीह, बोराबिंदा, केशरगड़िया, डिमुडीह और ईचागढ़ के दियाडीह, रुगड़ी, खोकरो, मैसाढ़ा, गाराडीह, मातकमडीह, लोपसोडीह, छोटा आमड़ा, हुटुप, ईचागढ़, पातकुम, हुरलूंग, बाबूचामदा और कालीचामदा सहित 40 से अधिक गांवों के किसान इस संकट से जूझ रहे हैं।
*विस्थापित अधिकार मंच ने उठाए 3 बड़े सवाल*
विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने कहा कि 11 सेंटीमीटर की गिरावट सिर्फ आंकड़ा है, राहत नहीं। असली राहत तब होगी जब खेतों से पानी पूरी तरह निकलेगा।
उन्होंने प्रशासन से तीन सीधे सवाल पूछे हैं –
*1. जलस्तर प्रबंधन की जिम्मेदारी किसकी?* अगर डैम का जलस्तर बढ़ने से खेत डूबते हैं तो इसका प्रबंधन कौन करेगा?
*2. फसल नुकसान का आकलन कौन करेगा?* खेतों में पानी से खराब हो रही फसल का सर्वे और रिकॉर्ड कौन तैयार करेगा?
*3. भरपाई कौन देगा?* किसानों के नुकसान की भरपाई की जवाबदेही तय कौन करेगा?
*आपात में अफसरों से संपर्क नहीं*
राकेश महतो ने कहा कि सबसे गंभीर बात यह है कि जब किसान अपनी फसल डूबता देख अधिकारियों को फोन करते हैं तो मुख्य अभियंता और कार्यपालक अभियंता से संपर्क ही नहीं हो पाता। ऐसे में आपात स्थिति में किसान किसके पास जाएं? प्रशासन को एक इमरजेंसी हेल्पलाइन और नोडल अधिकारी घोषित करना चाहिए।
*पुरस्कार बनाम खेत की हकीकत*
उन्होंने कहा कि चांडिल परियोजना को मिले पुरस्कार और उपलब्धियों की चर्चा अपनी जगह है, लेकिन विकास की असली तस्वीर डूबे हुए खेतों में दिखती है। किसी भी परियोजना की सफलता का पैमाना सिर्फ बांध और बिजली नहीं, बल्कि विस्थापितों का पुनर्वास, मुआवजा और उनकी फसल की सुरक्षा भी होना चाहिए।
मंच ने मांग की है कि प्रशासन आज ही सभी प्रभावित गांवों में स्थल निरीक्षण करे, ड्रोन या फील्ड सर्वे से जलजमाव का रिकॉर्ड तैयार करे और भविष्य में जलस्तर बढ़ने से 24 घंटे पहले किसानों को अलर्ट जारी करने की व्यवस्था बनाए।
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