
सरायकेला :-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल अंतर्गत दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के पश्चिम रेंज में पत्रकार को धमकी देने का मामला सामने आया है। दलमा इको कॉटेज तोड़े जाने की खबर को कवर करने गए पत्रकार को चांडिल रेंजर द्वारा वनरक्षी के फोन से धमकी देने का आरोप लगा है।
आरोप है कि रेंजर ने फोन पर कहा कि पत्रकार पर ऐसी धारा लगाएंगे कि जिंदगी भर बेल नहीं होगी। पत्रकार ने इस मामले में सीडीआर जांच कर कार्रवाई की मांग की है।

*क्या है पूरा मामला* पिंडराबेड़ा गेस्ट हाउस के पास पर्यटन विभाग की निधि से 15 इको कॉटेज का निर्माण कराया गया था, जिसे इको रिट्रीट के रूप में विकसित किया गया था। सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल इम्पावर्ड कमेटी (CEC) ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया है कि दलमा वन्यजीव आश्रयणी और इको-सेंसिटिव जोन में बिना नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्ड लाइफ (NBWL) की NOC के बने सभी अवैध निर्माणों को तोड़ा जाए और जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए।

इसी आदेश के बाद इन कॉटेजों को तोड़ने का काम शुरू किया गया है। आरोप है कि वन विभाग घरेलू गैस कटर से कॉटेज की कटिंग करा रहा है और काटे गए सामान को जादूगोड़ा और घाटशिला भेजा जा रहा है।
जब पत्रकार समाचार संकलन के लिए मौके पर पहुंचे तो उन्हें पिंडाराबेड़ा गेस्ट हाउस स्थित कार्यरत ठिकेदार कर्मी एवं वन विभाग वनपाल एवं वनपाल द्वार रोक दिया गया। इस जगह पर मुख्य चेकनाका माकुलाकोचा, डाहूबेड़ा और चालियामा पड़ाडीह चेक नाका पर तैनात वनकर्मियों ने रोक दिया और प्रोटोकॉल का हवाला देकर बहस की। वहीं मौके पर मौजूद ठेकेदार कर्मी ने हाईकोर्ट की परमिशन होने की बात कही।
*उठ रहे हैं सवाल*
सवाल उठ रहा है कि जब पर्यटन विभाग द्वारा इको कॉटेज का उद्घाटन पत्रकारों को बुलाकर फीता काटकर किया गया था, तो अब तोड़े जाने की कवरेज से क्यों रोका जा रहा है? पत्रकारों को जंगल के भीतर जाने से रोकने के पीछे क्या छिपाया जा रहा है? यह चर्चा अब आम लोगों में भी हो रही है।
इस संबंध में दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के डीएफओ सवा आलम अंसारी से दूरभाष पर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है, निर्णय आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
आज द लमा सेंचुरी में दस वर्षों से एक भी हाथी नहीं हे।आज।गज।परियोजना के नाम से जाने वाले हाथी जंगल से बाहर निकल गए।क्योंकि गजों की झुंड भोजन पानी पर्याप्त मात्रा नहीं मिलने के कारण ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में डेरा डाला हुआ हे ।ओर जंगल की बिहोड़ो में एक भी हाथी नहीं हे ।सवाल दालमा घूमने पहुंचे पर्यटकों का सवाल हे पहले की अपेक्षा सेंचुरी में हाथी एवं वन्य जीवजंतु देखने को नहीं मिलता है।?
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