
सरायकेला : चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच के बैनर तले शनिवार को चांडिल स्थित द गोल्डन रिसोर्ट (आईबी परिसर) में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में चांडिल डैम परियोजना से प्रभावित विस्थापितों की 44 वर्षों से लंबित पुनर्वास, मुआवजा, भूमि अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार एवं आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
मंच ने स्पष्ट किया कि विस्थापितों की समस्याओं के समाधान के लिए अब सामूहिक नेतृत्व और एकजुटता के साथ गांव-गांव संवाद स्थापित किया जाएगा।
*7 से 12 सितंबर तक निकलेगी संवाद यात्रा*
मंच के सदस्य राकेश रंजन महतो ने बताया कि 7 सितंबर से 12 सितंबर तक 116 गांवों एवं 13 पुनर्वास स्थलों में संवाद यात्रा आयोजित की जाएगी। यह यात्रा ईचागढ़ प्रखंड के सोडो पंचायत के जारगोडीह गांव से शुरू होगी।
उन्होंने कहा कि संवाद यात्रा का मुख्य उद्देश्य चांडिल डैम से प्रभावित प्रत्येक विस्थापित परिवार तक पहुंचना और उनकी समस्याओं को सीधे सुनना है। समस्या चाहे सामूहिक हो या व्यक्तिगत, उसे लिखित रूप से दर्ज किया जाएगा। गांव-गांव जाकर विस्थापितों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ उन्हें एक मंच पर जोड़ने का काम किया जाएगा।
राकेश रंजन महतो ने कहा कि 44 वर्षों से विस्थापित अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में परिवार पुनर्वास, मुआवजा, जमीन, रोजगार और मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। संवाद यात्रा के दौरान प्रत्येक गांव की समस्याओं का दस्तावेज तैयार किया जाएगा। यात्रा पूरी होने के बाद सभी गांवों एवं पुनर्वास स्थलों के प्रतिनिधियों के साथ एक व्यापक बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें प्राप्त समस्याओं पर चर्चा कर आंदोलन की आगे की रणनीति और रूपरेखा सामूहिक रूप से तय की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति या संगठन का आंदोलन नहीं, बल्कि चांडिल डैम से प्रभावित सभी विस्थापितों का साझा संघर्ष है। मंच का उद्देश्य है—एक परियोजना, एक मंच, एक आवाज और सामूहिक नेतृत्व के माध्यम से विस्थापितों की आवाज को मजबूत करना।
*मनोहर महतो: कई गांवों में आज भी नहीं बनी विकास पुस्तिका*
मंच के सदस्य मनोहर महतो ने कहा कि 44 वर्ष बीत जाने के बावजूद हाड़ात, पहाड़पुर, चिरकुई, सोनागाढ़ा, रुगड़ी सहित कई गांवों की स्थिति आज भी गंभीर है। इन गांवों की 90 प्रतिशत से अधिक जमीन जल भंडारण क्षेत्र में आने के बावजूद कई परिवारों को अब तक पूर्ण विस्थापित के रूप में उनका अधिकार नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार पुनर्वास की बात तो करती है, लेकिन जिन पुनर्वास स्थलों पर लोगों को बसाया जाना है, वहां आज भी पर्याप्त सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कई प्रभावित परिवारों को आज तक उनकी विकास पुस्तिका/पहचान संबंधी दस्तावेज तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। ऐसे में उन्हें किस आधार पर पूर्ण रूप से पुनर्वासित माना जाएगा?
मनोहर महतो ने मांग की कि जिन गांवों की जमीन बड़े पैमाने पर जलाशय में चली गई है, उनकी पुनः नापी कराकर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाए और पात्र परिवारों को नियमानुसार पूर्ण विस्थापित का दर्जा दिया जाए। उन्होंने कहा कि पहले विस्थापितों के लंबित अधिकारों और पुनर्वास की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, उसके बाद ही जलस्तर बढ़ाने अथवा परियोजना से जुड़े अन्य निर्णयों पर आगे बढ़ा जाए।
*नारायण गोप: नीति-नियमों के अनुरूप अधिकार मिले*
मंच के सदस्य नारायण गोप ने कहा कि 44 वर्षों से विभाग विस्थापितों के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। विस्थापित आयोग के गठन के बावजूद उसके प्रावधानों को लागू नहीं किया जा रहा है और नीति-नियमों में लगातार बदलाव किया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि पहले विस्थापितों के लंबित अधिकार और पुनर्वास की समस्याएं दूर की जाएं।
*अंबिका यादव: जल से होने वाले राजस्व में विस्थापितों का भी अधिकार हो*
मंच के सदस्य अंबिका यादव ने कहा कि चांडिल डैम के पानी से विभिन्न कंपनियां लाभ उठा रही हैं, जबकि विस्थापितों को उसका उचित लाभ नहीं मिल रहा है। उन्होंने जल से होने वाले राजस्व और उससे जुड़े न्यायालयीन मामलों की समीक्षा कर विस्थापितों के हित में ठोस पहल करने की मांग की।
*मकसूद आलम: रोजगार के अवसर बढ़ाए सरकार*
मंच के सदस्य मकसूद आलम ने कहा कि विस्थापित क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों की भारी कमी है। सरकार को विस्थापितों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में गंभीरता से काम करना चाहिए।
*अकलू धीवर: विस्थापितों के मुद्दों पर गंभीरता जरूरी*
मंच के सदस्य अकलू धीवर ने कहा कि सरकार को वर्षों से लंबित विस्थापितों के मुद्दों को गंभीरता से लेकर समयबद्ध तरीके से समाधान करना चाहिए।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंच के सदस्यों ने एक स्वर में कहा कि 7 से 12 सितंबर तक चलने वाली संवाद यात्रा में 116 गांवों और 13 पुनर्वास स्थलों के प्रत्येक विस्थापित परिवार को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। गांव-गांव से प्राप्त समस्याओं और सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।
मंच ने कहा कि यदि लंबे समय से लंबित विस्थापितों के अधिकारों पर सरकार गंभीर पहल नहीं करती है, तो भविष्य में सामूहिक नेतृत्व के साथ व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
*चांडिल डैम विस्थापित समन्वय मंच “एक परियोजना – एक मंच – एक आवाज – सामूहिक नेतृत्व”*
इस अवसर पर अंबिका यादव, नारायण गोप, श्यामल मार्डी, राकेश महतो, अकलू धीवर, सिपाही गोप, विनोद बिहारी गोप, मनोहर महतो, आनंद महतो, आशीष राम धीवर, गोमा हांसदा, मोहम्मद मकसूद आलम आदि लोग उपस्थित थे।
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