• Tue. Aug 25th, 2026

सरायकेला: चांडिल के कदमडीह में श्मशान घाट की जमीन पर स्वास्थ्य केंद्र निर्माण का विरोध, ग्रामीणों ने कहा – 200 साल पुरानी आस्था से खिलवाड़ । *कदमडीह, कुम्हारपाड़ा और सिकली के ग्रामीणों का आरोप – भू-माफियाओं ने घेरी श्मशान की जमीन, उपायुक्त और मंत्री को दिया ज्ञापन*

Subhasish Kumar's avatar

BySubhasish Kumar

Aug 25, 2026
crescent ad
सरायकेला : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के कदमडीह, कुम्हारपाड़ा और सिकली गांव के ग्रामीणों ने श्मशान घाट की जमीन पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाने का विरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन 200 साल से अधिक समय से उनके श्मशान घाट के रूप में उपयोग में है।
ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर उन्होंने मंत्री दीपक बिरुवा, चांडिल अंचल के अंचल अधिकारी और सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त को लिखित शिकायत देकर हस्तक्षेप की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत देने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है और श्मशान घाट की जमीन पर निर्माण कार्य जारी है।
ग्रामीणों के अनुसार मौजा कदमडीह, खाता संख्या 112, प्लॉट संख्या 273, किस्म- अनाबाद बिहार सरकार, रकबा 1 एकड़ 57 डिसमिल जमीन पर उनके पूर्वजों के समय से आदिवासी कुम्हार, घासी, भूमिज, कर्मकार, मछुआ, भुइयां समेत सभी जाति के लोग हिंदू रीति-रिवाज से श्मशान घाट के रूप में उपयोग करते आ रहे हैं। इस जमीन से उनकी आस्था और श्रद्धा जुड़ी हुई है।
*भू-माफिया पर जमीन हड़पने का आरोप*
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि चांडिल के कुछ भू-माफियाओं और बाहर के ठेकेदारों द्वारा इस श्मशान घाट की जमीन को हड़पने के लिए वहां स्वास्थ्य केंद्र बनाया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि ठेकेदार उपेंद्र सिंह और प्रदीप गिरी (बिहारी कॉलोनी निवासी) द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है – “अगर स्वास्थ्य केंद्र बनाना ही है तो दूसरी जगह बनाएं, हमारे 200 साल पुराने श्मशान घाट पर ही क्यों? यह हमारी आस्था के साथ खिलवाड़ है। हम यहां स्वास्थ्य केंद्र नहीं बनने देंगे।”
ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने मंत्री दीपक बिरुवा, चांडिल प्रखंड के अंचल अधिकारी और सरायकेला उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर हस्तक्षेप की मांग की थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी बात नहीं सुनी गई तो तीनों गांव के लोग मिलकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed