
रिपोर्ट,अरुण कुमार सैनी केंदुआ(धनबाद)विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस हर साल 21 अगस्त को मनाया जाता है। यह दिन बुजुर्गों के समाज में योगदान, उनके ज्ञान और अनुभवों का सम्मान करने के लिए है। यह वृद्धजनों की देखभाल और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाता है। उद्देश्य और महत्व समाज और परिवार में वरिष्ठ नागरिकों के अमूल्य योगदान को मान्यता देना है।
बुजुर्गों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार या उपेक्षा के मुद्दों पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वृद्धजनों के स्वास्थ्य, कल्याण और गरिमापूर्ण जीवन के प्रति समाज को जागरूक करना ही वरिष्ठ नागरिक दिवस मनाने की सार्थकता होगी ।बुजुर्गों को अकेलापन महसूस न होने देना और उन्हें अपनों का साथ देने के लिए ही इस दिवस की शुरूआत सबसे पहले संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई थी।

वर्ष 1988 में तत्कालीन राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने 21 अगस्त को इस दिन के रूप में घोषित किया था इसके बाद धीरे-धीरे यह एक वैश्विक उत्सव बन गया और दुनिया में बुजुर्गों के सम्मान में मनाया जाने लगा।

यह बात नेशनल सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के राष्ट्रीय संरक्षक सह नेशनल पेट्रोन सह झारखंड आंदोलनकारी हरिपद रवानी ने कहा।उन्होंने इस दिवस पर भारत सरकार से पूर्व की तरह पुरुष वरिष्ठ नागरिक को 40 और महिला वरिष्ठ नागरिक को 50 प्रतिशत ट्रेनों में सफर के लिए रियायत देने की मांग की है।
आयुष्मान स्वास्थ्य योजना, वृद्धा पेंशन का लाभ भी समय पर मिले और इस लाभ के लिए हर गांव में कैंप लगे। उनकी मांगो का भरत विश्वकर्मा, रामजी यादव, श्याम लोहार, ज्वाला प्रसाद,राम नरेश ठाकुर ,कृष्ण नोनिया, काली रवानी और राजाराम ने समर्थन किया है ।
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