• Tue. Jun 23rd, 2026

शाम होते ही गांव में हाथी, सुबह होते ही झगड़ा: चांडिल डैम के बाद अब ‘किसका हाथी’ बना नया विवाद

admin's avatar

Byadmin

Jun 23, 2026
crescent ad

 

सरायकेला : दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी की गज परियोजना क्षेत्र से पलायन कर आए हाथियों का झुंड इन दिनों ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के ईचागढ़, कुकडू और नीमडीह प्रखंड के छोटे-बड़े जंगलों में डेरा डाले हुए है। शाम ढलते ही झुंड गांवों में प्रवेश कर उपद्रव मचाने लगा है। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और मानव-हाथी संघर्ष की स्थिति बनी हुई है।

 

*‘किसका हाथी’ पर वन विभाग मौन* स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये हाथी झारखंड के हैं या पश्चिम बंगाल के, इसकी पहचान ही नहीं हो पा रही। दोनों राज्य के वन विभाग एक-दूसरे पर दायित्व डालकर ग्रामीणों को गुमराह कर रहे हैं। आम नागरिक सवाल कर रहे हैं कि हाथी की झुंड तो मौजूद है, पर पहचान झारखंड और बंगाल दोनों के पास नहीं है।

 

बीते रात दोनों राज्यों की सीमावर्ती क्षेत्र में हाथी देखे गए। पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के बागामुंडी माठा वन क्षेत्र के अयोध्या पहाड़ में हाथी का झुंड था। उसे झारखंड के सरायकेला-खरसावां के चांडिल वन क्षेत्र की सीमा से होते अयोध्या पहाड़ जाने से दोनों राज्यों की एलिफेंट ड्राइव टीम रोक रही थी। ग्रामीण पूछ रहे हैं कि आखिर हाथी जाए तो कहां जाए? भोजन-पानी के लिए कहां भटके? हाथी ‘मेरा राज्य का नहीं’ कहकर वन्यजीव संकट में पड़ रहा है।

 

*चांडिल डैम बना अभिशाप*

वनरक्षी वशिष्ठ नारायण के अनुसार वन्य जीव की प्रकृति से छेड़छाड़ दंडनीय अपराध है, लेकिन विस्थापित ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के विपरीت काम करने को मजबूर होना पड़ता है। उनका कहना है कि हाथी समस्या का सबसे बड़ा कारण चांडिल डैम है। बहु-उद्देशीय परियोजना के नाम पर बना डैम आज तक कोई उद्देश्य पूरा नहीं कर पाया। उल्टे ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र को विस्थापन और हाथी समस्या विरासत में मिली है, जो अब जनसरोकार नहीं बल्कि चुनावी मुद्दा बन गई है।

 

*राजनीति हावी, समाधान गायब* आरोप है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि हाथी समस्या को हथियार बनाकर विस्थापित और प्रभावित क्षेत्रों को वोट बैंक बना रहे हैं। वे वन विभाग और अधिकारियों को घेरने का काम करते हैं, पर समस्या के मूल कारण और समाधान तक पहुंचने की कोशिश नहीं करते।

 

*वन विभाग की चेतावनी*

वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने हाल में चेतावनी जारी की है कि हाथियों के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ करने वालों पर कानूनी कार्रवाई होगी। किसी वन अधिकारी से दुर्व्यवहार करने पर भी कार्रवाई की जाएगी।

 

ग्रामीणों की मांग है कि दोनों राज्य मिलकर हाथियों की पहचान, मॉनिटरिंग और पलायन मार्ग तय करें, ताकि मानव जीवन और वन्यजीव दोनों सुरक्षित रह सकें।

 

स्थिति एक नजर में:..

*क्षेत्र:* ईचागढ़ विधानसभा – ईचागढ़, कुकडू, नीमडीह प्रखंड के जंगल

*स्रोत:* दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी, गज परियोजना से पलायन

*समय:* शाम से सुबह तक गांवों में प्रवेश, उपद्रव

*विवाद:* झारखंड-बंगाल वन विभाग एक-दूसरे पर टाल रहे जिम्मेदारी

*स्थानीय मत:* चांडिल डैम बना मुख्य कारण, विस्थापन बढ़ा

चेतावनी: वन विभाग – हाथी से छेड़छाड़ या अधिकारी से दुर्व्यवहार पर कार्रवाई


There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *