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चरपोखरी के बालिका विद्यालय में रचा गया ‘बाल कला कुंभ’, 150 कलाकृतियों से सजी ज्ञानोत्सव की गैलरी

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May 24, 2026
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कला अभिव्यक्ति का माध्यम है, अभिव्यक्ति की आंतरिक तीव्रता संभवतः स्वप्न या मन की कल्पना तरंगों से मिलती है। बच्चे अपने कल्पनाओं की दुनियां का सृजन या रूप रेखा अपने घर परिवार या फिर स्थानीय रहन-सहन को आधार बनाकर करते हैं। स्कूली शिक्षा में फिल हाल के दिनों में कला गतिविधि को बड़ा सहज ही स्वीकार्यता मिली है। मैं बात रखना चाह रहा हूं स्थानीय प्रोजेक्ट बालिका+2 विद्यालय चरपोखरी भोजपुर में दिनांक 20 से 23 मई तक संचालित ज्ञानोत्सव ( लर्निंग फेस्टिवल) की। इस कला शिविर में तकरीबन 50 छात्राओं ने हिस्सा लिया और अपनी कला कौशल विकास के प्रतीक मिशन ज्ञानोत्सव को सफल बनाया। तकरीबन 150 कलाकृतियों का सृजन इस कला शिविर छात्राओं द्वारा किया गया। कला के भिन्न-भिन्न तरिकों में छात्राओं द्वारा सृजित चित्र मूर्ति शिल्प व पोस्टर लोक कला की बालपन समझ खुलकर कला प्रदर्शनी में देखी गई।

प्रोजेक्ट बालिका+2 विद्यालय चरपोखरी के कला प्रेक्षागृह में प्रदर्शित चित्र में सहज सपाट स्फूर्त कलाकृतियां अपने मौलिक मूल्यों को लेकर प्रतिबद्ध दिखीं।चार दिनों तक कला शिक्षक चित्रकार रौशन राय और संगीत शिक्षक प्रमोद कुमार के कला निर्देशन में छात्राओं ने खुलकर अपनी कलात्मक प्रतिभा को चित्र धरातल पर उकेरी। ज्ञानोत्सव दिशा निर्देश के अनुसार ही कला शिविर में छात्राओं को शुरूआती कला जानकारी देने के बाद स्वतंत्र छोड़ दिया गया। फिर क्या था छात्राओं ने खुलकर रंगों रेखाओं से खेलना शुरू कर दिया, देखते देखते तीन दिनों में कलाकृतियों का जमावड़ा लग गया।

लोक कला संस्कृति से जुड़ी कलाएं भोजपुरी चित्र कोहबर लेखन,पीड़िया लेखन, मधुबनी, टिकूली कला, मंजूषा चित्र शैली जैसी लोक शैलीयों से कला दीर्घा सज गई। कला की दूसरी विधा में गीत संगीत नृत्य की तैयारियां भी चल रही थी। चार दिनों तक विद्यालय में कलात्मक गतिविधियों का माहौल बना रहा। छात्राओं द्वारा सृजित चित्र में बालपन के निश्छल प्रवृत्ति, चित्र धरातल को रंगीन बनाने की कौशल ने विद्यालय को अन्य विद्यालयों से अलग पहचान बनाने में सहयोगी साबित हुआ। वहीं दूसरी तरफ संगीत शिक्षक प्रमोद कुमार अपने गहरी अनुभव को खुलकर छात्राओं के बीच गीत संगीत नृत्य तैयारियों में लगा दिया। कुल मिलाकर यह आयोजन कई मायने में विद्यालय इतिहास में याद रखा जाएगा। समूह गीत संगीत समूह नृत्य सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुतियां देखने लायक थी। कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन प्रभारी प्रधानाध्यापक अजय राय ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। एक तरफ कला दीर्घा में तकरीबन 150 चित्र प्रदर्शित किया गया था,उसी कला दीर्घा में 50 क्राफ्ट मूर्ति शिल्प के प्रदर्शन से कला दीर्घा में बाल कला की जमावड़ा दिखी। चक्षु कलाओं की अगर बात रखी जाएं तो ढेरों ऐसे सक्षम कलाकारों ने बाल कला बाल मनोविज्ञान को अपने चित्रों में स्थान दिया है। विद्यालय में समय-समय पर कला गतिवधियां होते रहने से छात्राओं में एक अलग ही रचनात्मक विकास विकसित करता है।

इस आयोजन की प्रसांगिकता पर गहराई पूर्वक विचार रखा जाए तो पाएंगे विद्यालय परिवार के सभी सदस्य एक मौलिक एहसास के साथ तैयारीयों में जुट गए थे। विद्यालय शिक्षिकाओं का बड़ा गहरा असर रहा गैलरी परिकल्पना में। शिक्षिका अर्पिता यादव, गृहविज्ञान शिक्षिका पिंकी कुमारी, अंग्रेजी शिक्षिका रविनंदनी, शिक्षिका अंशिका कुमारी, मनोविज्ञान शिक्षिका रिंकल कुमारी के सामूहिक गैलरी परिकल्पना आयोजन को शीर्ष बना दिया था। कला गैलरी का अवलोकन करते हुए शिक्षिकाओं ने छात्राओं द्वारा सृजित कलाकृतियों पर कहा कि समय का समकालीन सच यहीं है। हमारे मन-मस्तिष्क में स्थानीय समझ जो विकसित करती है और हम वहीं सृजित करते हैं।

पूरे आयोजन में बिहार के कला संस्कृति गीत संगीत नृत्य, चित्र रचना एक तरह से कहा जा सकता है कि रचनात्मक बाल कला कुंभ की तरह यह आयोजन था। चित्रों में बिहार को ध्यान में रखकर बिहार की कला को बाल मन में ढाला गया था। गांव कस्बों की मोटी पतली गलियां ,नाहर, पेंड -पौधे, पहाड़, फूल -पत्ते, बिहारी उत्सव, बिहार की विरासत, ऐतिहासिक स्थल, कबाड़ से जुगाड़ जैसे ढेरों विषय चित्र का हिस्सा बना। बाल -मन मिजाज में सापाट रंग रोगन ज्यादातर चित्रों में मोटी पतली लकीरों के साथ दिखा। विद्यालयों में ज्ञानोत्सव जैसी आयोजन नवाचार शिक्षा का ही हिस्सा है।तब हैं कि हम कच्ची उम्र की प्रतिभा को समय रहते पहचान कर, उन्हें उचित मंच प्रदान करना शुरू कर दें।

कला मूर्तन व अमूर्तता के बीच बाल कला शैली को धीरे-धीरे ही सही स्वीकार करना शुरू कर दिया है समाज। गांव कस्बा के विद्यालयों में इस तरह के गतिविधि छात्र-छात्राओं को निश्चित रूप से कुछ खास व अलग करने कि प्रेरणा देगी। छात्रा नंदनी कुमारी,शीवानी कुमारी, मुस्कान कुमारी, रागिनी कुमारी, किरण कुमारी, ज्योति कुमारी, प्रिया कुमारी, सुरूची कुमारी, सलोनी कुमारी, अंजली कुमारी, सोनम कुमारी, रुचि कुमारी,अती सुन्दर के द्वारा सृजित मूर्ति शिल्प, चित्र को लोगों ने खुब सराहा।

पूरे आयोजन में तकनीकी सहयोग शुभांशु शर्मा,नीरज कुमार, चर्चिल टैगोर,मीना देवी के साथ गणित शिक्षक सुकेश कुमार का रहा। वहीं कलात्मक सहयोग में शिक्षिका अर्पिता यादव, गृहविज्ञान शिक्षिका पिंकी कुमारी, मनोविज्ञान शिक्षिका रिंकल कुमारी, अंग्रेजी शिक्षिका रविनंदनी शिक्षिका अंशिका कुमारी ने अपने कलात्मक अनुभव को कला कुंभ में छात्राओं के साथ खुद को खूब व्यस्त रखा।

वहीं आयोजन के दूसरे पक्ष में संगीत शिक्षक प्रमोद कुमार इस आयोजन में खुद को साबित करने में सक्षम रहें। श्री प्रमोद कुमार ने छात्राओं के साथ समूह गायन में अपने अनुभव के शीर्ष समझ को आयोजन के बेहतरी के लिए तत्पर दिखे।तरह तरह के समूह गायन समूह नृत्य एकल गायन ने दर्शकों को आयोजन में बांधे रखा। पूरे आयोजन को संयोजित और खाका गत किए थे चित्रकार कला शिक्षक रौशन राय ने। श्री राय ने अपने संबोधन में कहा कि बाल रचनाधर्मिता आने वाले समय में नवाचार शिक्षा का मजबूत हिस्सा बना रहेगा। छात्राओं में कला कौशल गतिविधि का विकास संदर्भ के साथ विद्यालय का हिस्सा बन एक सृजनात्मक पहचान स्थापित करेगा।

 


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