
सरायकेला : चांडिल बांध विस्थापित एवं प्रभावित क्षेत्रों में जंगली हाथियों के आतंक से ग्रामीण दहशत में हैं। विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।


*”घर टूट रहे, फसल बर्बाद, जान-माल का नुकसान”:*
राकेश रंजन महतो ने कहा कि चांडिल बांध विस्थापित एवं प्रभावित क्षेत्रों में लगातार हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। आए दिन हाथियों द्वारा घरों को तोड़ा जा रहा है, किसानों की फसलें बर्बाद की जा रही हैं तथा ग्रामीणों की जान-माल को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग की उदासीनता एवं नाकामी के कारण इस प्रकार की घटनाएं लगातार हो रही हैं। बार-बार हाथियों के गांव में प्रवेश करने की घटनाओं के बावजूद कोई ठोस एवं स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है।
*”सबसे बड़ा सवाल”:*
मंच अध्यक्ष ने पूछा- _”सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हाथी बार-बार गांवों की ओर क्यों भटक रहे हैं? क्या वन विभाग के पास इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए कोई प्रभावी योजना नहीं है?”_
*”कब तक डर के साये में जिएं”:*
ग्रामीणों का कहना है कि आखिर कब तक लोग डर और दहशत के बीच अपना जीवन जीने को मजबूर रहेंगे। रात होते ही हाथियों के झुंड का खौफ सताने लगता है। बच्चे पढ़ नहीं पाते, महिलाएं खेत नहीं जा पातीं।
*स्थायी समाधान की मांग:*
विस्थापित अधिकार मंच ने सरकार एवं वन विभाग से इस गंभीर समस्या को तत्काल संज्ञान में लेकर स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।न संगठन ने कहा कि हाथी कॉरिडोर बहाल हों, जंगल में पानी-चारे की व्यवस्था हो, गांवों को ‘रेड जोन’ घोषित कर माइकिंग सिस्टम बने और प्रभावितों को समय पर मुआवजा मिले, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
हाल ही में कुकड़ू के आदरडीह चौका गांव में हाथी ने ग्राम प्रधान गुरुपद गोप का घर तोड़ दिया था, जिसमें उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं।
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