


धनबाद, शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में विश्व पटल पर भारत का मान बढ़ाने वाले महान मनीषी, नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की जयंती आज धनबाद के गोविंदपुर स्थित क्रेसेंट इंटरनेशनल स्कूल (Crescent International School) में अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और उत्साह के साथ मनाई गई। विद्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम ने न केवल गुरुदेव के प्रति सम्मान व्यक्त किया, बल्कि विद्यार्थियों को उनकी कालजयी विरासत से रूबरू होने का एक महत्वपूर्ण अवसर भी प्रदान किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाओं और विद्यार्थियों द्वारा गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। पूरा विद्यालय परिसर ‘रवीन्द्र संगीत’ और गुरुदेव के विचारों की ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया। इस अवसर पर आयोजित विशेष सभा में गुरुदेव के बहुआयामी व्यक्तित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को बताया कि टैगोर केवल एक कवि नहीं थे, बल्कि वे एक ऐसे युगद्रष्टा थे जिन्होंने साहित्य, संगीत, कला और शिक्षा के माध्यम से पूरी मानवता को एक नई दिशा दी।
शिक्षकों ने अपने संबोधन में गुरुदेव के शिक्षा दर्शन की चर्चा करते हुए कहा कि वे प्रकृति के सानिध्य में शिक्षा देने के प्रबल पक्षधर थे। शांतिनिकेतन की स्थापना उनके इसी विजन का परिणाम थी, जहाँ ज्ञान को चारदीवारी से मुक्त कर खुले आकाश के नीचे पनपने का अवसर दिया गया। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्व के एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो देशों (भारत और बांग्लादेश) ने अपने राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया है। उनके साहित्य का मुख्य स्वर मानवतावाद, विश्व बंधुत्व और संकीर्णता से मुक्ति है।
समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने गुरुदेव के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। विद्यालय परिवार ने जोर देकर कहा कि आज के डिजिटल युग में भी टैगोर के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं जितने एक सदी पहले थे। उनकी रचनाएं हमें न केवल ज्ञान की खोज की प्रेरणा देती हैं, बल्कि एक संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनने की राह भी दिखाती हैं। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाया गया, जिससे वातावरण देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना से भर उठा। इस आयोजन ने छात्रों के मन में अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व का भाव जागृत किया और सृजनशीलता के नए द्वार खोले।
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