

झरिया : कोयलांचल क्षेत्र में सड़कों पर बेलगाम दौड़ते भारी वाहनों ने एक बार फिर एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है। मंगलवार की शाम जब सूरज ढल रहा था, तब झरिया के सिंह नगर इलाके में रफ्तार का एक ऐसा खूनी खेल खेला गया जिसने मानवता को झकझोर कर रख दिया। एक अनियंत्रित और कोयले से लदे हाइवा ने बाइक पर जा रहे एक परिवार को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे मौके पर ही एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई।

घटना के संदर्भ में प्राप्त विवरण के अनुसार, बलियापुर के रहने वाले शांती महतो अपनी चालीस वर्षीय पत्नी सुनीता देवी और अपने युवा पुत्र संतोष महतो के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर केंदुआ की दिशा में जा रहे थे। परिवार संभवतः किसी निजी कार्य या गंतव्य की ओर शांतिपूर्ण तरीके से बढ़ रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही उनकी बाइक सिंह नगर के समीप पहुंची, सामने से काल की रफ्तार में आ रहे हाइवा संख्या JH01 CS 8123 ने उन्हें सीधी और जोरदार टक्कर मार दी।
टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक पर सवार तीनों लोग सड़क पर जा गिरे। दुर्भाग्यवश सुनीता देवी सीधे हाइवा के भारी-भरकम पहियों की दिशा में गिरीं। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता या उन्हें खींच पाता, हाइवा के टायर उनके सिर को कुचलते हुए निकल गए। सिर पर लगी इस गंभीर और प्राणघातक चोट के कारण सुनीता देवी ने अपने पति और जवान बेटे के सामने ही तड़पते हुए दम तोड़ दिया। वह मंजर इतना खौफनाक था कि बेटा संतोष अपनी मां के निर्जीव शरीर को देख दहाड़ें मारकर रोने लगा और उसकी चीखें पूरे इलाके में गूंज उठीं।
हादसे को अंजाम देने के बाद चालक ने संवेदनहीनता का परिचय दिया और पकड़े जाने के डर से वाहन को बीच सड़क पर छोड़कर मौके से फरार हो गया। इस घटना ने स्थानीय लोगों के धैर्य का बांध तोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और देखते ही देखते झरिया-केंदुआ मुख्य मार्ग एक युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया। आक्रोशित भीड़ ने सड़क को पूरी तरह बाधित कर दिया, जिसके कारण दोनों ओर मालवाहक और निजी वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं।
मौके पर मौजूद लोगों का स्पष्ट कहना है कि यह दुर्घटना केवल एक इत्तेफाक नहीं बल्कि प्रशासनिक विफलता का नतीजा है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि सिंह नगर का यह इलाका भारी वाहनों के लिए एक डेंजर जोन बन चुका है। इससे पहले भी कई बार यहां मासूम लोग इन दैत्याकार वाहनों की चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। स्थानीय लोगों ने बार-बार प्रशासन से मांग की है कि कोयला लदे वाहनों के लिए वैकल्पिक रूट तय किया जाए या फिर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में उनकी गति और समय सीमा निर्धारित की जाए, लेकिन इन चेतावनियों को हमेशा अनसुना किया गया।
स्थिति की गंभीरता और बढ़ते तनाव को भांपते हुए झरिया थाना की पुलिस भारी सुरक्षा बल के साथ घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस के आने के बाद भी माहौल काफी तनावपूर्ण बना रहा। खबर लिखे जाने तक महिला का पार्थिव शरीर सड़क पर ही मौजूद था, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन और संबंधित विभाग किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जागेंगे? झरिया की इन संकरी और व्यस्त सड़कों पर आखिर कब तक बेगुनाह लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे? एक मां का साया उठ जाना और एक सुहाग का उजड़ जाना केवल एक आंकड़ा बनकर रह जाएगा या फिर इस बार इन ‘यमराज’ रूपी हाइवा पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस कदम उठाया जाएगा? स्थानीय जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली कार्रवाई चाहती है।
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