
रिपोर्ट: विजय कुमार,सरायकेला


सरायकेला :झारखंड में लगातार बढ़ रहे मानव-हाथी संघर्ष के पीछे की सबसे बड़ी वजह सामने आई है – हाथियों के परंपरागत आवागमन पथ यानी हाथी कॉरिडोर_ में बड़े पैमाने पर हुए निर्माण कार्य।
*क्या है हाथी कॉरिडोर..?*
हाथियों के परंपरागत आवागमन पथ को हाथी कॉरिडोर के तौर पर जाना जाता है। यह कॉरिडोर अयोध्या हिल से लेकर दलमा पहाड़ और दलमा पहाड़ होते हुए सारंडा जंगल तक जाता है। हाथी पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसी रास्ते से आना-जाना करते हैं।
*विकास ने रोका रास्ता:?*
परन्तु इस कॉरिडोर के बीच कई बड़े निर्माण कार्य किए गए हैं। अयोध्या पहाड़ पर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट, दलमा पहाड़ के सामने चांडिल डैम और सारंडा जंगल पर किरीबुरु माइंस जैसे प्रोजेक्टों ने बड़े पैमाने पर हाथियों के निवास स्थान के साथ ही उसके आवागमन को भी बाधित कर दिया है। यह सतत विकास के नाम पर मानव जीवन के अस्तित्व पर ही सवालिया निशान उठा रहा है।
*300 साल तक नहीं भूलते रास्ता:..?*
वन विशेषज्ञों का कहना है, एक हाथी अगर 100 साल जीता है तो उसकी तीन पीढ़ी मतलब 300 साल तक हाथी उसी रास्ते से आना-जाना करता है। यह रास्ता उसके परमानेंट मेमोरी में इंस्टॉल्ड रहता है।”_ रास्ता बंद होने पर हाथी भटककर गांवों में घुस जाते हैं और संघर्ष होता है।
*वनपाल ने माना – स्थानांतरण सबसे बड़ी वजह:..?*
वन क्षेत्र चांडिल के वनपालो के माना कि हाथियों के परंपरागत निवास स्थान का स्थानांतरण मानव-हाथी संघर्ष का सबसे बड़ा कारण है। चांडिल फॉरेस्ट रेंज पिछले कई सालों से हाथियों के लिए अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र बना हुआ है। यह क्षेत्र मानव-हाथी संघर्ष के फलस्वरूप हजारों जान-माल की हानि का गवाह बन चुका है।
*वनपाल के सामने सवाल:..?*
1. जब कॉरिडोर चिन्हित था तो बड़े प्रोजेक्ट की अनुमति कैसे मिली?
2. दलमा में पानी-भोजन की वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?
3. कॉरिडोर बहाल करने के लिए अतिक्रमण हटाने पर काम कब शुरू होगा?
4. 300 साल पुराने रास्ते को रोककर क्या हम स्थायी समाधान की उम्मीद कर सकते हैं?
*ग्रामीणों की मांग:..?*
हाड़ात गांव में 2 मौतों एंब तीन लोग गंभीर के बाद ग्रामीणों ने मांग की है कि दलमा गज परियोजना के नाम रुपया का खर्च,ईको सेंसेटिव जॉन ओर ट्यूरिजियम को बढ़ावा दे रहा हे परन्तु हाथी पलायन पर रोक क्यों नहीं ,हाथी कॉरिडोर को अतिक्रमण मुक्त किया जाए। दलमा में तालाब और घास के मैदान विकसित हों। तभी मानव और गजराज दोनों सुरक्षित रह पाएंगे। वरना तिल-तिल कर मरने को मजबूर रहेंगे। यही कारण है कि उनके रास्ते में कई गाँव और घर आ रहे हैं जो उनके कॉर्रिडोर मे बाधक बनने का काम कर रहे हैं.. जिसे लोग हाथियों के भटकाव के रूप में जानते हैं। हाथी एक अत्यंत संवेदनशील प्राणी है जो कभी भी हिंसक हो ही नहीं सकता है लेकिन स्थानीय समस्याओं ने उन्हें कालांतर में हिंसक बना दिया है..!!!
वर्तमान पीढी सभ्यता के विकास के उस अंधी दौड़ में शामिल हो गयी है जिसकी मिसाल कोई देखने वाला नहीं रह जायेगा.. ! क्योंकि.. विकास कहीं आगे निकल जायेगा और हमारी सृष्टि बहुत पीछे छूट जायेगी, यही कडवा सच है और इसे जितना जल्दी हम समझ जाएं हमारे लिए बेहतर होगा।
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