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7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स: मनोज भावुक को ‘बेस्ट लिरिसिस्ट’ का सम्मान, रजनीश मिश्रा को समर्पित किया पुरस्कार

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Mar 19, 2026

 

 

 

पटना, 16 मार्च 2026: बिहार की सांस्कृतिक राजधानी पटना का बापू सभागार रविवार, 15 मार्च को भोजपुरी सिनेमा के दिग्गजों और सितारों से गुलजार रहा। अवसर था 7वें सरस सलिल भोजपुरी सिने अवार्ड्स 2026 का, जहाँ कला और संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया। इस भव्य समारोह में सिवान जिले के गौरव और बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी मनोज भावुक को वर्ष 2025 के लिए ‘बेस्ट लिरिसिस्ट’ (सर्वश्रेष्ठ गीतकार) के प्रतिष्ठित पुरस्कार से नवाजा गया।

फिल्म ‘दुलहिनिया नाच नचावे’ के लिए मिला सम्मान

 

मनोज भावुक को यह पुरस्कार उनकी चर्चित भोजपुरी फिल्म ‘दुलहिनिया नाच नचावे’ के मर्मस्पर्शी और कर्णप्रिय गीतों के लिए दिया गया। समारोह के मुख्य अतिथि और इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IMPA) के अध्यक्ष अभय सिन्हा ने उन्हें ट्रॉफी प्रदान कर सम्मानित किया।

 

भावुक संबोधन: पुरोधाओं को किया याद

 

पुरस्कार ग्रहण करने के बाद अपने संबोधन में मनोज भावुक काफी भावुक नजर आए। उन्होंने केवल अपनी सफलता का जश्न मनाने के बजाय फिल्म उद्योग की नींव रखने वाले पूर्वजों के प्रति सम्मान प्रकट किया। उन्होंने कहा:

 

“भोजपुरी अवार्ड समारोहों की असली सार्थकता तब है, जब हम उन लोगों को भी याद करें जिन्होंने इस उद्योग की बुनियाद रखी। आज हम जहाँ खड़े हैं, वह उन पुरोधाओं के संघर्ष का परिणाम है। असली खुशी तब होगी जब हमारे इस दुनिया में न रहने पर भी लोग हमारे काम को याद कर तालियाँ बजाएँ।”

 

उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय और यह सम्मान प्रसिद्ध संगीतकार रजनीश मिश्रा को समर्पित किया। भावुक ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें फिल्मी गीतों की दुनिया से जोड़ने और उन पर भरोसा जताने का श्रेय रजनीश मिश्रा को ही जाता है। इसके साथ ही उन्होंने फिल्म के निर्माता निशांत उज्ज्वल के प्रति भी आभार व्यक्त किया।

 

भोजपुरी सिनेमा का ‘इनसाइक्लोपीडिया’

 

मनोज भावुक केवल एक गीतकार ही नहीं, बल्कि भोजपुरी साहित्य और सिनेमा के एक गंभीर शोधकर्ता भी हैं। उद्योग में उन्हें “भोजपुरी सिनेमा का इनसाइक्लोपीडिया” कहा जाता है। उनकी जोड़ी संगीतकार रजनीश मिश्रा के साथ बेहद सफल रही है। इस जोड़ी ने ‘मेहंदी लगा के रखना’ का कालजयी गीत “तोर बउरहवा रे माई”, ‘मेहमान’ फिल्म का “मेरे राम” और ‘आपन कहाये वाला के बा’ जैसे सुपरहिट गीत दिए हैं, जिन्होंने भोजपुरी संगीत को अश्लीलता से दूर एक नई गरिमा प्रदान की है।

 

एक संक्षिप्त परिचय: मनोज भावुक का सफर

 

लेखन और शोध: उनकी शोधपरक पुस्तक ‘भोजपुरी सिनेमा के संसार’ में वर्ष 2025 तक के सिनेमाई इतिहास का संकलन है। इसके अलावा ‘चलनी में पानी’ और ‘तस्वीर ज़िंदगी के’ उनकी चर्चित कृतियाँ हैं।

अनुभव: वर्तमान में वे महुआ नेटवर्क में प्रोग्रामिंग हेड के पद पर कार्यरत हैं। इससे पूर्व वे ज़ी टीवी, न्यूज़18, टाइम्स नाउ, एनडीटीवी और सारेगामापा जैसे बड़े मीडिया हाउसों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं।

सिद्धांत: मनोज भावुक अपनी शालीनता और स्वच्छ लेखन के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कभी भी व्यावसायिक लाभ के लिए भाषाई मर्यादा से समझौता नहीं किया।

मनोज भावुक को मिला यह सम्मान न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष की जीत है, बल्कि यह उन सभी कलाकारों के लिए एक प्रेरणा है जो भोजपुरी भाषा की सुचिता और सम्मान को बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं।


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