
प्रियंका (दिल्ली)

पीडीडीयू नगर (मुगलसराय): दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF), जीआरपी और एनजीओ ‘एवीए’ की सतर्कता ने एक दो वर्षीय मासूम को मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ा लिया। अपहरण के कुछ ही घंटों के भीतर की गई इस कार्रवाई में एक महिला समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

घटना का विवरण
रेलवे स्टेशन की सीढ़ियों के नीचे अपने माता-पिता के साथ सो रहे बच्चे को तस्करों ने सुबह करीब 5 बजे अगवा कर लिया था। पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने बच्चे को पास की झाड़ियों में छिपा दिया और उसे चुप रखने के लिए दूध में अल्प्रासेन (Alprasen) नामक नशीली दवा मिलाकर पिला दी। यह दवा वयस्कों के अवसाद के लिए होती है, जो बच्चों के लिए जानलेवा हो सकती है।
नर्सिंग होम में बेचने की थी तैयारी
पूछताछ में गिरोह ने चौंकाने वाले खुलासे किए। उन्होंने स्वीकार किया कि वे एक संगठित सिंडिकेट का हिस्सा हैं जो बच्चों को बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित एक नर्सिंग होम में बेचते थे। आरोपियों को प्रत्येक बच्चे के बदले 20,000 रुपये या उससे अधिक मिलते थे। गिरोह अब तक आठ बच्चों की तस्करी की बात कबूल कर चुका है।
गिरफ्तारी और बरामदगी
सुबह 10:30 बजे के करीब संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर सुरक्षा बलों ने आरोपियों को तब पकड़ा जब वे ट्रेन पकड़ने की तैयारी में थे। उनके पास से नए कपड़े, डायपर, दूध की बोतल और नशीली गोलियां बरामद हुईं। ‘एवीए’ के वरिष्ठ निदेशक मनीष शर्मा ने बताया कि यह गिरोह बच्चों को गोद लेने, अंग व्यापार या अन्य शोषणकारी कार्यों के लिए इस्तेमाल करता है।
कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने बच्चे को उसके माता-पिता (निवासी रोहतास) से मिलवाकर चंदौली की बाल कल्याण समिति को सौंप दिया है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), किशोर न्याय अधिनियम और NDPS एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
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