
ईचागढ़ (सरायकेला): चांडिल अनुमंडल के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत बिस्टाटांड़ गांव में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार शाम दो जंगली हाथियों ने गांव में प्रवेश कर किसान संजय महतो के आलू के खेत में जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने न केवल कई क्विंटल फसल चट कर दी, बल्कि पैरों तले रौंदकर पूरी मेहनत बर्बाद कर दी।

शाम ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर ग्रामीण: ईचागढ़ वासी पिछले कई दिनों से दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि शाम ढलते ही हाथियों का झुंड भोजन की तलाश में रिहायशी इलाकों में घुस आता है। हाथियों के लगातार हमले और जान-माल के नुकसान के बावजूद वन विभाग की निष्क्रियता को लेकर स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी देखी जा रही है।

वन विभाग और गज परियोजना पर उठे सवाल: ग्रामीणों ने प्रशासन से तीखे सवाल पूछे हैं। उनका कहना है कि जब सरकार ने हाथियों के लिए दलमा गज परियोजना जैसी व्यवस्था की है, तो फिर ये झुंड आबादी वाले क्षेत्रों में क्यों डेरा डाले हुए हैं? आरोप है कि दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में पिछले पांच वर्षों से हाथियों के लिए भोजन और पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण गजराज जंगल छोड़कर गांवों की ओर रुख कर रहे हैं।
सुरक्षा और मुआवजे की मांग: पीड़ित किसान और ग्रामीणों ने सरकार से मुआवजे की मांग करते हुए पूछा है कि आए दिन हाथियों द्वारा लोगों को कुचलने और फसलों को बर्बाद करने का जिम्मेदार कौन है? ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही हाथियों को खदेड़ने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे।
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