
सरायकेला (चांडिल): जिले के लुपुंगडीह स्थित नारायण आईटीआई परिसर में रविवार को भारत के द्वितीय प्रधानमंत्री और सादगी के महानायक लाल बहादुर शास्त्री की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर संस्थान के संस्थापक सह भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जटाशंकर पांडे सहित शिक्षकों और प्रशिक्षुओं ने शास्त्री जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
सादगी और संघर्ष की जीवंत गाथा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जटाशंकर पांडे ने शास्त्री जी के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह एक साधारण परिवार में जन्मा बालक अपनी विद्वत्ता के बल पर “शास्त्री” बना और देश के सर्वोच्च पद तक पहुँचा। उन्होंने कहा, “शास्त्री जी का जीवन ईमानदारी, त्याग और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है। आज की युवा पीढ़ी को उनके जीवन से कठिन परिस्थितियों में भी सिद्धांतों पर अडिग रहने की प्रेरणा लेनी चाहिए।”

नैतिकता और साहस का नेतृत्व वक्ताओं ने शास्त्री जी द्वारा रेल मंत्री रहते हुए दुर्घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए दिए गए इस्तीफे और 1965 के भारत-पाक युद्ध में उनके साहसी नेतृत्व को याद किया। उनके द्वारा दिए गए ऐतिहासिक नारे “जय जवान, जय किसान” की महत्ता पर चर्चा करते हुए कहा गया कि यह नारा आज भी भारतीय सेना और किसानों के स्वाभिमान का प्रतीक है।

ताशकंद समझौते के बाद हुआ था निधन श्रद्धांजलि सभा में उल्लेख किया गया कि 11 जनवरी 1966 को ताशकंद (रूस) में शांति समझौते के दौरान उनका आकस्मिक और रहस्यमयी निधन हो गया था। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने शास्त्री जी के पदचिन्हों पर चलने और राष्ट्र सेवा का संकल्प लिया।
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