
देश के प्राचीन और प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान आईआईटी (ISM) धनबाद ने अपने 100वें स्थापना दिवस का भव्य समारोह आयोजित किया, जिसमें अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने छात्रों, पूर्व छात्रों और शिक्षकों को करीब 40 मिनट का प्रेरक भाषण दिया, जिसमें उन्होंने भारत की महाशक्ति बनने की राह के बारे में महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

गौतम अडानी ने कहा कि भारत को अपनी तकदीर खुद लिखनी होगी और इसके लिए सबसे पहले उसे अपनी जमीन और संसाधनों को पूरी तरह समझना और नियंत्रित करना जरूरी है। उन्होंने जोर दिया कि यदि भारत की जमीन और उसके नीचे मौजूद संसाधनों पर उसका पूरा अधिकार नहीं होगा तो वह कभी पूर्ण रूप से संप्रभु नहीं बन सकता। अडानी ने यह स्पष्ट किया कि जमीन पर कब्जा हो तो उसी की ऊर्जा पर भी कब्जा होता है, और ऊर्जा पर नियंत्रण ही संप्रभुता की कुंजी है।

अडानी ने आईआईटी-ISM धनबाद के 1926 में स्थापना के समय की दूरदर्शिता का महत्व बताते हुए कहा कि उस दौर में देश में स्वतंत्रता की आंधी के बीच इंडियन नेशनल कांग्रेस के नेताओं ने भविष्य को देखते हुए खनन और भू-वैज्ञानिक इंजीनियरों की जरूरत को पहचाना था। उन्होंने कहा कि कोयला, लोहा, तांबा, बॉक्साइट जैसे संसाधन भारत की रीढ़ की हड्डी हैं, और आज ये संसाधन भारत को विश्व में महाशक्ति बनाने की आधारशिला होंगे।
विश्व व्यवस्था में हो रहे बदलावों पर अडानी ने कहा कि पुराना वैश्विक व्यापार और सहयोग ढांचा टूट रहा है। अमेरिका, चीन, यूरोप जैसे शक्तिशाली देश अब अपनी घरेलू सुरक्षा और उत्पादन को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे सेमीकंडक्टर और दुर्लभ मिट्टी जैसे संसाधनों की महत्त्वपूर्ण लड़ाई छिड़ी है। उन्होंने कहा कि भारत को इस नए परिवर्तन को समझकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा और संसाधनों का पूर्ण नियंत्रण सुनिश्चित करना होगा।
गौतम अडानी ने युवाओं को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि इतिहास को कभी कैनवास नहीं समझना चाहिए, जिस पर कोई और अपनी मर्जी से तस्वीर बनाए। इतिहास को आईना बनाना चाहिए, जिससे अपने अतीत को समझकर भविष्य खुद बनाया जा सके। उन्होंने छात्रों से अनुरोध किया कि वे अपनी धरती की ताकत को पहचानें और उस पर पूरा हक जमाएं।
अखिर में उन्होंने संस्थान के छात्रों को याद दिलाया कि वे उस धरती पर अध्ययन कर रहे हैं जहां देश के 70 प्रतिशत से अधिक कोयला खदानें, लौह अयस्क, यूरेनियम और दुर्लभ खनिज मौजूद हैं। वे सिर्फ इंजीनियर नहीं, बल्कि उस टीम के हिस्से हैं जो आने वाले 50 वर्षों तक भारत की ऊर्जा और संप्रभुता की नींव रखेगी। अडानी ने इस काम को केवल नौकरी नहीं बल्कि राष्ट्रनिर्माण का महान कार्य बताया।
इस प्रकार, गौतम अडानी ने आईआईटी-ISM के शताब्दी समारोह के माध्यम से युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर देश के ऊर्जा और संसाधनों के प्रति जागरूकता बढ़ाई, जिससे भारत अपने महाशक्ति बनने के सपने को साकार कर सके।
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