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बिहार चुनाव में वर्ल्ड बैंक के ₹14,000 करोड़ खर्च पर हंगामा: आरोप-प्रत्यारोप का दौर

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Nov 17, 2025

 

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के समापन के तुरंत बाद राज्य की राजनीति में एक बड़ा वित्तीय विवाद खड़ा हो गया है। प्रशांत किशोर की पार्टी, जन सुराज, ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि विकास परियोजनाओं के लिए विश्व बैंक (World Bank) से प्राप्त ₹14,000 करोड़ की राशि का दुरुपयोग चुनावी लाभ के लिए किया गया। इन आरोपों ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जबकि एनडीए नेतृत्व ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।

 

*जन सुराज पार्टी का बड़ा दावा और आपत्ति*

 

विवाद के केंद्र में जन सुराज पार्टी के प्रवक्ता पवन वर्मा का बयान है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि बिहार सरकार ने ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के नाम पर 1.25 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खातों में ₹10,000 प्रति महिला की दर से पैसे ट्रांसफर किए। वर्मा ने दावा किया कि ₹14,000 करोड़ की यह विशाल राशि विश्व बैंक द्वारा किसी अन्य विशिष्ट विकास परियोजना के लिए आवंटित फंड से निकाली गई थी।

 

जन सुराज का सबसे महत्वपूर्ण और तीखा आरोप यह है कि यह फंड ट्रांसफर चुनावी आचार संहिता लागू होने से ठीक एक घंटा पहले किया गया था। पार्टी ने इस कदम को चुनावी नैतिकता के खिलाफ और सार्वजनिक धन का घोर दुरुपयोग बताया है। प्रवक्ता उदय सिंह ने इस ‘कैश ट्रांसफर’ को केवल चुनाव जीतने की मंशा से किया गया कार्य करार देते हुए, चुनावी नियमों के तहत इसकी गहन जांच की मांग की है। पवन वर्मा ने यह भी रेखांकित किया कि जब राज्य पर पहले से ही ₹4.06 लाख करोड़ का सार्वजनिक कर्ज है और प्रतिदिन ₹63 करोड़ ब्याज चुकाना पड़ता है, तब ऐसी बड़ी धनराशि का उपयोग अधिक जनकल्याणकारी और दीर्घकालिक विकास परियोजनाओं में किया जाना चाहिए था।

 

*एनडीए और चिराग पासवान की कड़ी प्रतिक्रिया*

 

जन सुराज के इन सनसनीखेज आरोपों पर सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। चिराग पासवान सहित अन्य एनडीए नेताओं ने इन आरोपों को निराधार और राजनीति से प्रेरित बताते हुए उन्हें खारिज कर दिया है।

 

सरकार की ओर से जारी स्पष्टीकरण में कहा गया है कि फंड का उपयोग पूरी तरह से कानूनी रूप से और सुनियोजित तरीके से निर्धारित योजनाओं में किया गया है। सरकार का दावा है कि ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ का उद्देश्य महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना है और यह ट्रांसफर किसी भी तरह से चुनावी लाभ के लिए नहीं किया गया है। एनडीए नेताओं ने जन सुराज से अपने आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने की मांग की है, जबकि उनके अनुसार वर्तमान में कोई विश्वसनीय साक्ष्य मौजूद नहीं है।

 

*जाँच और साक्ष्यों का इंतजार*

 

कुल मिलाकर, जन सुराज द्वारा लगाए गए ₹14,000 करोड़ के विश्व बैंक फंड के दुरुपयोग के आरोप ने बिहार की राजनीति में एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। जहां सरकार इसे विपक्षी पार्टी की चुनावी साजिश बताकर खारिज कर रही है, वहीं जन सुराज अपने तर्कों पर अडिग है। चूंकि इन आरोपों की कोई स्वतंत्र जांच या आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, इसलिए दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर डटे हुए हैं। यह मामला फिलहाल राजनीतिक गरमा-गरमी और बहस का केंद्र बना हुआ है, जिसमें आगे की जांच और साक्ष्यों के उजागर होने पर ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।


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