
दीपावली के पावन अवसर पर हज़ारीबाग़ के विधायक प्रदीप प्रसाद ने स्थानीय कारीगरों और स्वदेशी उत्पादों के सम्मान का आह्वान करते हुए कहा कि, त्योहारों का सार केवल खुशियों का उत्सव नहीं, बल्कि अपने लोकल शिल्पकारों और मेहनतकश हाथों का सम्मान करने का अवसर भी है। जब हम अपने कुम्हार भाईयों के बनाए मिट्टी के दीप जलाते हैं, तो केवल घर ही नहीं, उनके जीवन में भी उजाला भरता है।
विधायक प्रदीप प्रसाद ने रविवार को अपनी बिटिया के साथ जाकर स्थानीय कुम्हारों से मिट्टी के दीप खरीदे। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का वास्तविक अर्थ तभी साकार होगा, जब हम अपने लोकल उत्पादों को प्राथमिकता देंगे और स्वदेशी संस्कृति को जीवन का हिस्सा बनाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” के आह्वान को जन-जन तक पहुँचाना हर नागरिक का कर्तव्य है।

“हर घर स्वदेशी, घर-घर स्वदेशी” — यही इस दीपावली का मंत्र होना चाहिए। स्थानीय कारीगरों से खरीददारी कर हम उनके परिश्रम का सम्मान करें और अपने त्योहार को आत्मनिर्भरता की भावना से जोड़ें।

विधायक ने जनता से अपील की कि इस दीपावली पर चैनिज या विदेशी उत्पादों से परहेज़ करते हुए स्वदेशी वस्तुओं, मिट्टी के दीपों, देशी मिठाइयों और स्थानीय हस्तशिल्प को अपनाएँ। इससे न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि ग्रामीण एवं पारंपरिक कारीगरों के जीवन में भी नई रोशनी फैलेगी।
अंत में प्रदीप प्रसाद ने कहा कि, दीप जलाना केवल रोशनी का प्रतीक नहीं, बल्कि एक भावना है। आत्मनिर्भरता की, स्वदेशी गर्व की, और अपने लोकल नायकों के सम्मान की। आइए, इस दीपावली हर घर को स्वदेशी दीपों से जगमगाएँ और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त बनाएँ।
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