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बोकारो थर्मल: वाणी भवन में तुलसी-प्रेमचंद जयंती समारोह का भव्य आयोजन, “साहित्य राष्ट्र की आत्मा का दीप”

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Aug 1, 2025

 

बोकारो थर्मल: बोकारो थर्मल स्थित हिंदी साहित्य परिषद, वाणी भवन में संत शिरोमणि गोस्वामी तुलसीदास और युगचेतक कथाशिल्पी मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में श्रद्धा, संवेदना और सांस्कृतिक चेतना का एक दिव्य संगम देखने को मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ परिषद के संरक्षक एवं उप महाप्रबंधक प्रशासन कालीचरण शर्मा, अध्यक्ष डॉ. सुमन कुमार झा, और सचिव दीनानाथ शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद दोनों महान साहित्यकारों की तस्वीरों पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।

सचिव दीनानाथ शर्मा ने अपने स्वागत भाषण में परिषद की साहित्यिक यात्रा और प्रस्तावित योजनाओं का परिचय दिया। उन्होंने रामचरितमानस को भारतीय जीवन मूल्यों का दर्पण बताया और प्रेमचंद को सामाजिक यथार्थ का मूक उद्घोषक कहा। इस अवसर पर उमाचंद्र प्रसाद को परिषद के स्वर्ण जयंती समारोह में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उमाचंद्र प्रसाद ने अपने संबोधन में कहा कि “साहित्य वह दीप है, जो राष्ट्र की आत्मा को आलोकित करता है।”

अध्यक्ष डॉ. सुमन कुमार झा ने तुलसी और प्रेमचंद को भारतीय चेतना के पुरोधा बताते हुए उनके साहित्य को आत्मविकास और सांस्कृतिक नवजागरण का पथप्रदर्शक बताया। संरक्षक श्री कालीचरण शर्मा ने परिषद की गतिविधियों की सराहना करते हुए, तुलसी और प्रेमचंद के कृतित्व को भारतीय मानस की शाश्वत ध्वनि करार दिया।

अंजना प्रसाद ने तुलसी साहित्य की सामाजिक व मानवीय भावनाओं को हृदयस्पर्शी रूप में प्रस्तुत किया। धीरेंद्र कुमार ने कार्यकर्ताओं के समर्पण को सांस्कृतिक पुनर्जागरण का आधार बताया, जबकि देवनील कर्ण ने इसे हिंदी चेतना का नवप्रभात कहा।

समारोह में परिषद के कर्मठ कार्यकारी सदस्यों जैसे केदार नाथ मिश्र, सुनील कुमार, शशिभूषण प्रसाद, छाया सिन्हा, रमोद कुमार, बंशी राय, रंजीत कुमार और जयंत कुमार पांडेय सहित सैकड़ों साहित्य प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

 

कार्यक्रम के अंत में, स्वतंत्रता दिवस पर परिषद की वेबसाइट के लोकार्पण और विद्यालय स्तर पर हिंदी प्रचार की घोषणा की गई। रामचरितमानस ग्रंथ की भेंट के उपरांत धीरेंद्र कुमार द्वारा दिए गए भावपूर्ण धन्यवाद ज्ञापन के साथ समारोह का समापन हुआ।

 


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