
धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले के बाघमारा थाना क्षेत्र के जमुनिया में एक अवैध कोयला खदान में खनन के दौरान चाल धंसने से 9 मजदूरों की मौत की खबर आ रही है, जबकि कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। यह हादसा 1995 की गजलीटांड कोलियरी त्रासदी की भयावह यादें ताजा कर गया है, जब 64 कोलकर्मियों की जल समाधि हो गई थी। इस नई घटना ने एक बार फिर अवैध खनन, कोयला माफिया और प्रशासन की संदिग्ध भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

*घटना का विवरण और पीड़ितों का दर्द*

22 जुलाई 2025 को जमुनिया गांव में हुए इस भीषण हादसे में गिरिडीह जिले के ताराटांड थाना क्षेत्र के कुंडलवादाह और बुढ़वाशेर निवासी दिलीप साव समेत कम से कम पांच मजदूरों के फंसे होने की बात सामने आई है। मृतकों की संख्या 9 बताई जा रही है, हालांकि प्रशासन ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। दिलीप साव के पिता बूटन साव ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि खदान में अचानक पानी का तेज बहाव आया, जिससे उनका बेटा और अन्य मजदूर अंदर फंस गए। उन्होंने प्रशासन से अपने बेटे का शव सौंपने की गुहार लगाई है।
दिलीप की पत्नी गुड़िया देवी ने दुख व्यक्त करते हुए बताया कि माफियाओं ने खदान के मुहाने को मिट्टी और पत्थरों से दबा दिया है, जिससे उनके पति और अन्य मजदूरों का पता लगाना और भी मुश्किल हो गया है। परिजनों का आरोप है कि उन्हें घटनास्थल पर जाने से भी रोका जा रहा है और काले रंग की गाड़ियों में आए कुछ लोगों ने उन्हें धमकी दी है।
*नेताओं ने उठाई सीबीआई जांच की मांग, प्रशासन पर लीपापोती का आरोप*
इस घटना के बाद जमशेदपुर पश्चिमी से विधायक सरयू राय और गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायना लिया। जेडीयू विधायक सरयू राय ने पूरे मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत सरकार की बीसीसीएल, सीआईएसएफ और स्थानीय जिला प्रशासन इस हादसे के लिए जिम्मेदार हैं। सरयू राय ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें रात में ही 15 मजदूरों के फंसे होने की सूचना मिली थी, जिसकी जानकारी उन्होंने धनबाद एसएसपी को दी थी। उन्होंने दावा किया कि अवैध खनन करने वाले अपना एक सशस्त्र दस्ता बना चुके हैं जो मीडिया को भी कवरेज से रोकता है।
गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी को भी घटनास्थल पर स्थानीय लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा, जिन्होंने उन पर राजनीति करने का आरोप लगाया। हालांकि, सांसद ने आरोप लगाया कि विरोध करने वाले कोयला माफिया के लोग थे, जो प्रशासन के साथ मिलकर लीपापोती करने में जुटे हैं। उन्होंने 12 से अधिक लोगों के मलबे में दबे होने का दावा किया और पुलिस को पांच मजदूरों के नाम और पते भी सौंपे, लेकिन पुलिस ने लिखित शिकायत के बिना कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। घंटों इंतजार के बाद सांसद ने खुद लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच का आश्वासन दिया है।
*संगठित कोयला माफिया पर कार्रवाई क्यों नहीं?*
यह घटना एक बार फिर इस गंभीर मुद्दे को उजागर करती है कि धनबाद और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कोयला खनन एक संगठित अपराध का रूप ले चुका है। जिस तरह से इतनी बड़ी संख्या में मजदूर अवैध खदानों में काम करने को मजबूर हैं और माफिया बिना किसी डर के अपने सशस्त्र दस्ते के साथ खुलेआम घूम रहे हैं, यह दर्शाता है कि उन्हें स्थानीय प्रशासन और सत्ता से संरक्षण प्राप्त है।
विधायक सरयू राय ने सीबीआई पर भी सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि धनबाद में सीबीआई का कार्यालय होने के बावजूद इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यह आश्चर्यजनक है कि जब मजदूरों की जान जा रही है और अवैध खनन खुलेआम जारी है, तब भी कानून प्रवर्तन एजेंसियां मूक दर्शक बनी हुई हैं। अवैध उत्खनन से न केवल मजदूरों की जान को खतरा है, बल्कि यह सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचा रहा है और पर्यावरण को भी क्षति पहुंचा रहा है।
जरूरत है कि भारत सरकार और राज्य सरकार इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और एक उच्च-स्तरीय जांच सुनिश्चित करें। सिर्फ मजदूरों की मौत पर लीपापोती करने या मुआवजे की घोषणा करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक संगठित कोयला माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं होगी और प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे और गरीबों की जान जाती रहेगी। यह समय है कि जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाए और अवैध खनन के इस नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जाए।
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