
धनबाद : झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति की एक महत्वपूर्ण सभा आज सुजीत रंजन मुखर्जी की अध्यक्षता में धनबाद के मैनेइटांड में संपन्न हुई। इस बैठक में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए वक्ताओं ने झारखंड में बांग्ला भाषा के उन्नयन और संरक्षण पर गहन चर्चा की। सभी वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि झारखंड के 24 में से 22 जिलों में आज भी ग्रामीण अपनी मातृभाषा बांग्ला के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

सभा में बताया गया कि गांवों में टुसू, भादू, जितिया, करमा जैसे पर्व और बंगाली समुदाय के वर्षभर के तेरह पर्व बांग्ला भाषा में ही मनाए जाते हैं, जो इस भाषा की जड़ों को मजबूती से दर्शाते हैं। समिति के संस्थापक बेंगू ठाकुर पिछले 26 वर्षों से इस मुद्दे को लेकर गांव से लेकर शहर तक लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उनके संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि 2011 में अम्बोना रेलवे स्टेशन पर महिलाओं और पुरुषों ने झाड़ू लेकर रेल का चक्का जाम किया था। इसी तरह, 2012 में गोविंदपुर के देवली में जी-टी रोड को लगभग चार घंटे तक 26 ग्रामीण जातियों की महिलाओं ने संस्थापक बेंगू ठाकुर के साथ मिलकर जाम कर दिया था। इन दोनों आंदोलनों का ही प्रतिफल था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने बांग्ला भाषा को झारखंड की द्वितीय राजभाषा के रूप में गजट में पारित किया।

बैठक में धनबाद के धैया में 9 जून 2023 को बंगाली दंपति राणा दास और मानसी दास की माफिया तत्वों द्वारा कुचल कर हत्या किए जाने की घटना का भी जिक्र किया गया, जिसकी आवाज संस्थापक बेंगू ठाकुर ने ही उठाई थी।
आज की बैठक में उपस्थित सभी वक्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि अगस्त महीने में झारखंड बांग्ला भाषा उन्नयन समिति अपनी मातृभाषा को बचाने के लिए एक जोरदार आंदोलन करेगी। यह आंदोलन ‘आर-पार’ का होगा, जिसका उद्देश्य बांग्ला भाषा को उसका उचित सम्मान और स्थान दिलाना है।
इस महत्वपूर्ण सभा में प्रदेश उपाध्यक्ष भवानी बनर्जी, गोविंदो ठाकुर, शामल राय, अशोक पाल, अनिल कुंभकार, पप्पू सूत्रधर, शिबू चक्रवर्ती, तरुण गोस्वामी, सपन चैटर्जी, छोनंदा गोराई, मामोनी सेन, काजोल ठाकुर, मानसी चैटर्जी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। यह बैठक झारखंड में बांग्ला भाषा के भविष्य के लिए एक नई रणनीति और मजबूत संकल्प का संकेत देती है।
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