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ओकनी तालाब को लेकर ऐतिहासिक फैसला: NGT का कायाकल्प का आदेश, 3 जुलाई 2026 तक काम पूरा करने का निर्देश

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Jul 10, 2025

 

हजारीबाग: हजारीबाग के ओकनी तालाब के संरक्षण को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में हजारीबाग पर्यावरण संरक्षण ट्रस्ट को एक बड़ी जीत मिली है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 3 जुलाई 2025 को सुनवाई करते हुए ओकनी तालाब के कायाकल्प का रुका हुआ काम 3 जुलाई 2026 तक पूरा करने का आदेश दिया है। यह फैसला तालाब को अतिक्रमण और प्रदूषण से बचाने के लिए प्रयासरत लोगों के पक्ष में आया है, जिससे ₹1 करोड़ 39 लाख के विकास कार्य फिर से शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।

 

NGT का कड़ा रुख और DC को निर्देश

जस्टिस बी. अमित स्थालेकर (न्यायिक सदस्य) और अरुण कुमार वर्मा (विशेषज्ञ सदस्य) की पीठ ने विभिन्न जांच रिपोर्टों, स्थल निरीक्षण प्रतिवेदनों और पर्यावरण ट्रस्ट के अध्यक्ष जयगोपाल राय द्वारा प्रस्तुत तथ्यों का अवलोकन किया। NGT ने हजारीबाग के उपायुक्त (DC) को निर्देश दिया है कि वे यह तय करें कि तालाब को दूषित करने, कचरा फेंकने और नाली का पानी गिराने के लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही, तालाब के संरक्षण के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना (एक्शन प्लान) बनाने का भी निर्देश दिया गया है।

 

उच्चस्तरीय जांच रिपोर्टों का खुलासा

इस मामले में NGT के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय समिति ने स्थल जांच कर रिपोर्ट सौंपी थी। इस रिपोर्ट में तालाब के आसपास गंदगी के फैले होने, पानी को दूषित करने और नाली का पानी गिराने की बात कही गई थी। सदर अंचल अधिकारी (CO) ने भी अपनी एक रिपोर्ट में उल्लेख किया कि शाहनवाज जमील द्वारा जमीन पर दावा करने के लिए दायर म्यूटेशन आवेदन (2898/2024-25) को स्थल निरीक्षण और पुराने रिकॉर्डों की जांच के बाद खारिज करने की सिफारिश की गई है, क्योंकि यह जमीन दशकों से सार्वजनिक उपयोग में रही है।

 

14.62 एकड़ में फैले तालाब के लिए विस्तृत कार्ययोजना

इन सभी रिपोर्टों और तथ्यों को ध्यान में रखते हुए 14.62 एकड़ में फैले ओकनी तालाब के लिए यह महत्वपूर्ण फैसला आया है। NGT द्वारा निर्देशित कार्ययोजना में निम्नलिखित बातों का जिक्र किया गया है:

 

नाली का पानी तालाब में न गिरे।

 

कचरा और गंदगी तालाब के मेढ़ पर जमा न हो।

 

तालाब के चारों ओर डस्टबीन की व्यवस्था हो।

 

तालाब की फेंसिंग की जाए ताकि जानवरों का प्रवेश बंद हो।

 

पानी में मौजूद गंदगी और जलकुंभी को हटाया जाए।

 

ट्रस्ट में खुशी का माहौल

NGT के इस आदेश के बाद हजारीबाग पर्यावरण संरक्षण ट्रस्ट के सदस्यों ने खुशी का इजहार किया। बारिश के बावजूद तालाब पर जमा होकर उन्होंने जीत का जश्न मनाया। पूर्व वार्ड पार्षद विशु विश्वकर्मा ने इस जीत पर ट्रस्ट के अध्यक्ष जयगोपाल राय और सचिव नीलेन्दु जयपुरियार को मिठाई खिलाकर बधाई दी।

 

यह फैसला हजारीबाग के पर्यावरणीय संरक्षण और सार्वजनिक स्थलों को बचाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।

 

 


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