लोहरदगा, बिहार: पतंजलि योग समिति एवं भारत स्वाभिमान जिला लोहरदगा के तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर स्थानीय गुरुकुल शांति आश्रम में हवन यज्ञ का आयोजन किया गया. इस मौके पर समिति के संरक्षक शिवशंकर सिंह ने गुरु की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उद्बोधन दिया.
समर्थ गुरु की जीवन में अहम भूमिका
शिवशंकर सिंह ने कहा कि एक समर्थ गुरु की व्यक्ति के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है. उन्होंने बताया कि गुरु के बिना जीवन की विभिन्न चुनौतियों से लड़ने में संबल नहीं मिल पाता. आज के परिप्रेक्ष्य में जीवन निर्माण में गुरु की भूमिका बेहद अहम है.
उन्होंने हमारी सनातनी संस्कृति के गुरु परंपरा के अद्वितीय उदाहरण देते हुए कहा कि यदि गुरु विश्वामित्र थे तो राम बने, गुरु संदीपनी थे तो कृष्ण बने, गुरु विरजानंद थे तो महर्षि दयानंद बने, चाणक्य थे तो चंद्रगुप्त बने और स्वामी रामकृष्ण परमहंस थे तो स्वामी विवेकानंद बने. सिंह ने कहा कि ऐसे अनेकों उदाहरण हैं जो गुरु की महत्ता का अद्भुत और बेजोड़ प्रमाण हैं, और हमें इस पर गर्व है.