
बिरेंद्र गिरी, पत्रकार

12 साल से सिर्फ घोषणाएं, जिले में ट्रॉमा सेंटर होता, तो ढाई सालों में बच सकती थीं 175 लोगों की जान

धनबाद : मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बेकार पड़ा है फंड, तो गोविंदपुर में जमीन नहीं ढूंढ़ पाए अधिकारी
शहर के 8 लेन रोड पर 5 जुलाई को दो बाइकों की टक्कर में 4 युवक जख्मी हो गए थे। उनमें से पीयूष को गंभीर चोटें आई थीं। उसे एक निजी अस्पताल से ले जाया गया। वहां से दुर्गापुर रेफर किया गया। दुर्गापुर पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया। ऐसे ही, हादसों में गंभीर रूप से घायल कई लोग हर माह सिर्फ समय पर इलाज नहीं मिलने से जान गंवा देते हैं। ऐसे घायलों की जान बचाने के लिए 12 साल पहले धनबाद के मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर बनाने की योजना बनी थी। बाद के दिनों में निरसा, तोपचांची, गोविंदपुर, महुदा में भी ट्रॉमा सेंटर खोलने की घोषणा हुई, पर कहीं शुरू नहीं हुआ।
परिवहन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि धनबाद में बारह साल के दौरान सड़क हादसों में 625 लोग मारे गए। इनमें से 390 मौतें जीटी रोड पर हुई। उनमें से 156 की मौत दुर्घटनास्थल पर ही और 59 की इलाज के दौरान हो गई। लेकिन, 175 जानें समय से इलाज शुरू नहीं होने की वजह से चली गई। जानकार भी मानते हैं कि जीटी रोड में ट्रॉमा सेंटर होता, तो गोल्डन आवर यानी एक घंटे के अंदर इलाज शुरू कर ये जानें बचाई जा सकती थीं।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर का सिर्फ नाम, न अलग से डॉक्टर, न ओटी
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ट्रॉमा सेंटर शुरू करने के लिए साल 2013 में सरकार ने 90 लाख रुपए अलॉट किए थे। यह फंड आज तक पढ़ा है। तब इमरजेंसी में अस्थायी ट्रॉमा सेंटर शुरू करने का निर्णय हुआ। वहां दीवार पर बड़े अक्षरों में ट्रॉमा सेंटर लिखवाया गया, लेकिन इसके बाद कुछ न हुआ। यहां न तो मापदंडों के अनुसार डॉक्टर रहते हैं और न ही ऑपरेशन थिएटर व अन्य संसाधनों का इंतजाम है।
गोविंदपुर जून 2022 में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में योजना बनी। मामला टलता रहा। 19 फरवरी 2025 की बैठक में डीसी ने गोविंदपुर सीओ को एक एकड़ जमीन चिह्नित करने को कहा। 25 जून को फिर समिति की बैठक हुई, पर उसमें सीओ जमीन की कोई जानकारी नहीं दे सके।
महुदा 2021 में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में महुदा में ट्रॉमा सेंटर बनाने की योजना बनी। जिसके तहत 4 जगहों पर भी सेंटर की योजना, पर चर्चा से आगे बात नहीं बढ़ी
दिसंबर 2022 में सरकार ने मंजूरी दी। निरसा सीएचसी को नए भवन ने में शिफ्ट कर खाली गोनेवाली बिल्डिंग में ट्रामा सेंटर बनाने की योजना बनी। उपकरण व एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के लिए राशि दी गई, लेकिन अब तक न सीएचसी की शिफ्टिंग हुई और नट्रॉमा सेंटर बना।
तोपचांची जून 2022 में ही समिति की बैठक में ट्रॉमा सेंटर खोलने का निर्णय हुआ, पर अब तक इसके लिए कुछ न किया गया।
डॉ अरुण कुमार वर्णवाल, जनरल सर्जन व एसएनएमएमसीएच के पूर्व अधीक्षक
गोल्डन आवर में इलाज शुरू, तो जान बचने की 80-90% उम्मीद
सड़क हादसों में कई तरह करें इंज्जुरी होती है। मरीज की जान बचाने के लिए गोल्डन आवर गानी शुरुआती एक घंटे सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। अगर सभी संसाधनों में गुक्त ट्रॉमा सेंटर हो, वहां ऑयों न्यूरो जनरल सर्जन, एनेस्थेसिया के विशेषज्ञ हो तो गोल्डन आवर में इलाज शुरू हो जाने पर जान बचने की उम्मीद 80-90% रहती है।
नए भवन में समय लगेगा, विकल्प ढूंढ़ रहे, मिलते ही शुरू होंगे सेंटर। जिले में फिलहाल तीन चिह्नित साहों पर ट्रॉमा सेंटर खोलने की योजना है। नया भवन बनाने में कुछ समय लग सकता है। वैकल्पिक भवन की तलाश की जा रही है। मिलने पर जल्द-से-जल्द ट्रॉमा सेंटर खोलें।
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