
नई दिल्ली: भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक गंभीर समस्या सामने आई है. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने पिछले चार महीनों में कुल 575 दवाओं को मानक गुणवत्ता से कम और नकली (स्प्यूरियस) के रूप में पहचाना है. इनमें आई ड्रॉप से लेकर पैरासिटामोल टैबलेट तक विभिन्न प्रकार की दवाएं शामिल हैं, जो मरीजों की सेहत के लिए खतरा बन सकती हैं.
CDSCO ने बताया कि अप्रैल में केंद्रीय दवा नियामकों ने 60 और राज्य के दवा नियामकों ने 136 दवाओं को मानक गुणवत्ता से कम, नकली, मिलावटी या गलत ब्रांडेड पाया. इसी प्रकार, मार्च में 131, फरवरी में 103 और जनवरी में 145 दवाएं ऐसी मिलीं जिनकी गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी.

इन दवाओं में विभिन्न दवा निर्माण कंपनियों के अलग-अलग बैच नंबर शामिल हैं. इनमें से कुछ प्रमुख दवाओं में हिमाचल प्रदेश के सोलन में निर्मित कार्बोक्सीमिथाइल सेल्यूलोज सोडियम आई ड्रॉप्स (सूखी आंखों के लिए उपयोगी), उत्तराखंड के हरिद्वार में बनी बुपीवाकेन हाइड्रोक्लोराइड इंजेक्शन (सर्जरी या अन्य चिकित्सा प्रक्रियाओं में उपयोग होती है), गुजरात की कैल्शियम और विटामिन D3 टैबलेट और हैदराबाद की आयरन सुक्रोज इंजेक्शन शामिल हैं.

स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सीडीएससीओ ने इन दवाओं के दोषपूर्ण बैचों को बाजार से वापस लेने के लिए संबंधित कंपनियों को निर्देशित किया है. उन्होंने यह भी बताया कि दवा महानियंत्रक (DCGI) लगातार दवाओं की गुणवत्ता पर नजर रखे हुए हैं और गलत दवाएं बनाने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहे हैं.
डॉ. तामोरिश कोले, जो अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन चिकित्सा महासंघ की क्लिनिकल प्रैक्टिस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष हैं, ने कहा कि आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं का मानक गुणवत्ता से नीचे होना एक गंभीर विषय है. उन्होंने कहा कि इस मामले को बहुत ही कड़ाई से देखा जाना चाहिए ताकि लोगों की जान और स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके.
उन्होंने आम जनता को भी चेतावनी दी कि वे बिना डॉक्टर की सलाह के इन दवाओं का सेवन न करें और ऐसे किसी भी दवा के उपयोग से पहले उचित जांच और परामर्श अवश्य करें. क्योंकि नकली या मिलावटी दवाओं का सेवन गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है.
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) का काम
CDSCO भारत सरकार की एक प्रमुख संस्था है जो दवाओं, टीकों, सर्जिकल उपकरणों और चिकित्सा उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता की निगरानी करती है. यह संगठन दवा कंपनियों को लाइसेंस प्रदान करता है, नई दवाओं के परीक्षण और आयात को नियंत्रित करता है, और दवाओं के निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करता है.
CDSCO की जिम्मेदारी है कि वह सभी दवाओं की नियमित जांच करे और यदि कोई दवा मानकों के अनुरूप न हो तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे. ऐसे मामलों में दोषपूर्ण दवाओं के बैच बाजार से हटाने के आदेश दिए जाते हैं ताकि मरीजों को सुरक्षित और प्रभावी दवाएं मिलें.
आम लोगों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
डॉक्टर से परामर्श करें: किसी भी दवा का उपयोग डॉक्टर की सलाह के बिना न करें.
दवा की पैकेजिंग जांचें: दवा खरीदते समय पैकेजिंग और लेबल को ध्यान से देखें.
संभावित दुष्प्रभावों से सावधान रहें: यदि दवा लेने के बाद कोई असामान्य प्रतिक्रिया हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.
सिर्फ मान्यता प्राप्त फार्मेसी से दवा खरीदें: संदिग्ध दुकानों से दवा खरीदने से बचें.
There is no ads to display, Please add some







Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
