
बुधवार की देर रात्रि शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक गर्भवती महिला के साथ हुई अमानवीय घटना से आक्रोशित समाजसेवी और भारतीय जनता पार्टी के नेता अर्जुन साव ने प्रशासनिक लापरवाही के विरुद्ध अपनी आवाज़ उठाई। इसी क्रम में शुक्रवार की रात्रि लगभग 12:30 बजे उन्हें सदर थाना प्रभारी द्वारा पूछताछ के बहाने थाना बुलाया गया। थाना का नाम सुनते ही कोई भी आम नागरिक स्वाभाविक रूप से घबरा जाता है।

फिर भी अर्जुन साव बिना देर किए थाने पहुंचे। लेकिन पूछताछ के बाद जब उन्हें जाने की अनुमति नहीं दी गई और उन्हें रातभर थाने में बैठाकर रखा गया, तो यह घटना न केवल व्यक्तिगत अपमान की श्रेणी में आती है, बल्कि लोकतंत्र में एक समाजसेवी की गरिमा और आम नागरिक के अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है।

शनिवार सुबह जैसे ही यह समाचार शहर में फैला, पूरे हजारीबाग में आक्रोश की लहर दौड़ गई। घटना की सूचना मिलते ही हजारीबाग लोकसभा सांसद मनीष जायसवाल, सदर विधायक प्रदीप प्रसाद और बरही विधायक मनोज कुमार यादव तत्काल सदर थाना पहुँचे और थाना प्रभारी से इस अनुचित कार्रवाई का जवाब माँगा।
जब संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो तीनों जनप्रतिनिधि थाने के समक्ष धरने पर बैठ गए। यह धरना करीब 4 घंटे तक चला और हजारीबाग की जनता भी बड़ी संख्या में इस धरने में शामिल हुई। जनदबाव और जनप्रतिनिधियों की दृढ़ता के सामने अंततः थाना प्रभारी को सार्वजनिक रूप से क्षमा माँगनी पड़ी।
उसके बाद धरना समाप्त किया गया। सदर विधायक प्रदीप प्रसाद ने कहा की यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि हजारीबाग की अस्मिता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए था। एक समाजसेवी को रातभर थाने में बैठाना और जवाबदेही से बचना प्रशासनिक गुंडागर्दी है। हम चेतावनी देते हैं कि अगर भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोहराई गईं तो यह आंदोलन और भी व्यापक और उग्र होगा।
भाजपा जनता की आवाज़ को दबने नहीं देगी। सांसद मनीष जायसवाल ने भी पुलिस प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा की यह जनता की अदालत थी, जिसमें जनता की जीत हुई है। अब हजारीबाग में पुलिस की गुंडागर्दी नहीं चलेगी। अगर ऐसी घटनाएं दोबारा हुईं, तो हम लोग इसे और बड़ा जनांदोलन बनाएंगे।
इस धरने ने यह स्पष्ट कर दिया कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ सर्वोपरि है, और जनप्रतिनिधि अपने कर्तव्यों से पीछे नहीं हटेंगे। यह घटना न केवल एक चेतावनी है, बल्कि प्रशासन के लिए एक संदेश भी कि कानून व्यवस्था की मर्यादा में रहकर ही कार्य करना होगा।
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