
संगठन की सचिव सुनीता सिंह ने कहा बाल विवाह की रोकथाम के लिए धर्मगुरुओं के बीच चलाया गया जागरूकता अभियान से इस अक्षय तृतीया जिले में नहीं होगा एक भी बाल विवाह।

लखीसराय (सुजीत कुमार) – बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए देश में नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (जेआरसी) के लखीसराय में सहयोगी संगठन विकासार्थ ट्रस्ट की ओर से अक्षय तृतीया और शादी विवाह के मौसम को देखते हुए बाल विवाह की रोकथाम के लिए विभिन्न धर्मों के विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहितो के बीच चलाए जा रहे

जागरुकता अभियान को व्यापक सफलता मिली है और सभी धर्म गुरुओं ने इसकी सराहना करते हुए समर्थन का हाथ बढ़ाया है। संगठन ने कहा कि यह देखते हुए कि कोई भी बाल विवाह किसी पंडित मौलवी या पादरी जैसे पुरोहित के बिना संपन्न नहीं हो सकता, हमने उन्हें बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ने का फैसला किया। इसके सकारात्मक नतीजों को देखते हुए हम उम्मीद कर सकते हैं कि इस अक्षय तृतीया पर जिले में एक भी बाल विवाह नहीं होने पाएगा। आज जिले में तमाम मंदिरों मस्जिदो के आगे ऐसे बोर्ड लगे हुए जिन पर स्पष्ट लिखा है कि यहां बाल विवाह की
अनुमति नहीं है। गौरतलब है कि जे आर सी 2030 तक देश से बाल विवाह खत्म करने के मकसद से चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया कैंपेन चला रही है। जीआरसी कानूनी हस्तक्षेपो के जरिए बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए देश के 416 जिलो में जमीन पर काम कर 250 से भी ज्यादा नागरिक संगठनों का नेटवर्क है जिसने पिछले वर्ष में दो लाख से ज्यादा बाल विवाह रुकवाए हैं और पांच करोड़ से ज्यादा लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है, इसके सहयोगी संगठन विकासार्थ ट्रस्ट ने स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग व समन्वय से कानूनी हस्तक्षेपो और परिवारो एवं समुदाय को समझा बुझा कर अकेले 2023- 24 में ही जिले में 300 से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं। यह संगठन 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जेआरसी संस्थापक भुवन ऋभु की किताब हुए व्हेन चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज में सुझाई गई समग्र रणनीति पर अमल कर रहा है। विकासार्थ ट्रस्ट की सचिव सुनीता सिंह ने कहा कि अभी भी देश में बाल विवाह से खिलाफ जरुरी
जागरुकता की कमी है ज्यादातर लोगों को यह पता नहीं है कि यह बाल विवाह निषेध अधिनियम (पीसीएमए) 2006 के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें किसी भी रुप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा व जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसमें बाराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर, साज सज्जा करने वाले डेकोरेटर हलवाई, माली बैंड बाजा वाले मैरेज हॉल के मालिक और यहां तक की विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा और उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है। उन्होंने कह की कि इसलिए हमने धर्मगुरुओं और पुरोहितों वर्ग के बीच जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया क्योंकि यह वो सबसे महत्वपूर्ण वर्ग है जो विवाह संपन्न कराता है। हमने उन्हें समझाया कि बाल विवाह और कुछ नहीं बल्कि बच्चों के साथ बलात्कार है। 18 वर्ष से कम उम्र की किसी बच्ची से वैवाहिक संबंधों में भी यौन संबंध बनाना यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) कानून के तहत बलात्कार है।बेहद खुशी का विषय है कि आज पंडित और मौलवी इस बात को समझते हुए न सिर्फ इस
अभियान को समर्थन दे रहे हैं बल्कि खुद आगे बढ़कर बालविवाद नहीं होने देने की शपथ ले रहे हैं। यदि पुरोहित वर्ग बाल विवाह संपन्न कराने से इंकार कर दे तो देश से रातों रात इस अपराध का सफाया हो सकता है। इस अभियान में उनके आशातीत सहयोग व समर्थन से हम अभिभूत है। इसको देखते हुए हमारा मानना है कि जल्द ही हम बाल विवाह मुक्त लखीसराय के लक्ष्य को हासिल कर लेंगे। इस दौरान सलाहकार शैलेश सिंह, समन्वयक संजय सिंह, सीएसडब्ल्यू सुनील वर्मा शामिल थे
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