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ईश्वर की आराधना से ही जीवन में सफलता मिलती है – पूज्य श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज

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ByBiru Gupta

Dec 24, 2024
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राधा कृष्ण सेवा ट्रस्ट एवं श्री श्री राधा कृष्ण प्रेम मंदिर के तत्वावधान में कथा व्यास श्री सुरेन्द्र हरिदास जी महाराज दुर्गा मंदिर ऊपर बाजार गोविंदपुर में द्वितीय दिवस की कथा में हरिदास जी महाराज ने भागवत कथा के प्रथम दिवस की शुरुआत भागवत आरती और विश्व शांति के लिए प्रार्थान के साथ की गई।

 

पूज्य श्री सुरेन्द्र हरीदास जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए में बैठे सभी भक्तों को भजन ” नारायणा नारायणा लक्ष्मी रमणा नारायणा भजन श्रवण कराया ”।

 

पूज्य श्री सुरेन्द्र हरीदास जी महाराज ने कथा की शुरुआत करते हुए कहा की कथा प्रांगण में आकर अपने शरीर को नहीं बल्कि अपनी आत्मा को खुश करो और मेरे भगवान के दर्शन करो, सुनो तो उनकी कथा सुनो और अगर कुछ कहो तो सिर्फ उनकी ही लीलाओं की बाते करो। दुर्गा मंदिर के प्रांगण में गोविंदपुर की इस पावन भूमि पर जब आप ऐसा करेंगे तो आपकी आत्मा को जो आनंद मिलेगा वो सीधा आपको मेरे ठाकुर के चरणों में ले जायेगा और ये तुम्हारे भाग्यों का ही उदय है की हमें राधा कृष्ण जी के चरणों में श्रीमद भागवत कथा सुनने का ये महाअवसर प्राप्त हुआ है।

 

महाराज श्री ने बताया की संसार में जितने रिश्ते है वो आप बड़े प्रेम से निभाते हो त्यौहार आ जाये तो रिश्तेदारों को लड्डू बांटते हो, मिठाई बांटते हो, गिफ्ट बांटते हो इत्यादि चीजे बांटते हो लेकिन कोई भी त्यौहार वैष्णवो का भगवान के रंग में रंगे बगैर नहीं बीतना चाहिए। जो सच्चा वैष्णव है उनके लिए परमात्मा का ही जैसे दुनिया के रिश्ते निभाते हो वैसे ही भगवान का भी रिश्ता प्रेमपूर्वक हमको निभाना चाहिए और जो ऐसा कर पाते है उनके जीवन का फिर कहना ही क्या।

 

भगवान के उत्सव में सम्मिलित होने का सौभाग्य बड़ी मुश्किल से मनुष्यों को प्राप्त होता है भगवान का कोई भी उत्सव हो जैसे हम लोग अपने घर के रिश्तेदार अपने परिवार के बच्चे बूढ़े इन सबके किसी के जन्मदिन में हम संम्मिलित होते है किसी के मैरिज एनिवर्सरी हम सम्मिलित होते है न जाने कौन – कौन से उत्सव हम लोग मनाते है ठीक वैसे ही वैष्णवों के लिए सबसे बड़ा उत्सव होता है भगवान के किसी भी उत्सव में सम्मिलित होने के लिए उनके जीवन का सर्वस्य वही होता है। जब से वृन्दावन में होली का और जन्माष्टमी का उत्सव प्रारम्भ किया वो रुकते नहीं है कभी चाहें स्थिति जो भी रही हो कितनी भी कठिन स्थितियां रही हो वो कभी रुके नहीं और यही अपनत्व है भगवान के प्रति। देखो क्षणिक भक्ति बहुत जल्दी आ जाती सब मे क्षणिक भक्ति समझते हो पहली बार कथा सुनी और झट भक्ति का नशा चढ़ गया अब तो भगवान को पाकर ही छोड़ेंगे।

 

पूज्य श्री सुरेन्द्र हरीदास जी महाराज ने कथा का वृतांत सुनाते हुए कहा की प्रारम्भ में यह की भागवत का महात्यम क्या है ? एक बार सनकादिक ऋषि और सुत जी महाराज विराजमान थे तो उन्होंने ये प्रश्न किया की कलियुग के लोगों का कल्याण कैसे होगा ? आप देखिये किसी भी पुराण में किसी और युग के लोगो की चिंता नहीं की पर कलयुग के लोगो के कल्याण की चिंता हर पुराण और वेद में की गई कारण क्या है क्योकि कलयुग का प्राणी अपने कल्याण के मार्ग को भूल कर केवल अपने मन की ही करता है जो उसके मन को भाये वह बस वही कार्य करता है। और फिर कलियुग के मानव की आयु कम है और शास्त्र ज्यादा है तो फिर एक कल्याण का मार्ग बताया भागवत कथा। श्रीमद भागवत कथा सुनने मात्र से ही जीव का कल्याण हो जाता है महाराज श्री ने कहा कि व्यास जी ने जब इस भगवत प्राप्ति का ग्रंथ लिखा, तब भागवत नाम दिया गया। बाद में इसे श्रीमद् भागवत नाम दिया गया। इस श्रीमद् शब्द के पीछे एक बड़ा मर्म छुपा हुआ है श्री यानी जब धन का अहंकार हो जाए तो भागवत सुन लो, अहंकार दूर हो जाएगा। इस सांसारिक जीवन में जो कुछ भी प्राप्त किये हो सब किराए के मकान की तरह है। खाली करना ही पड़ेगा।

 

व्यक्ति इस संसार से केवल अपना कर्म लेकर जाता है। इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो। केवल सुनो ही नहीं बल्कि भागवत की मानों भी। सच्चा हिन्दू वही है जो कृष्ण की सुने और उसको माने , गीता की सुनो और उसकी मानों भी , माँ – बाप, गुरु की सुनो तो उनकी मानो भी तो आपके कर्म श्रेष्ठ होंगे और जब कर्म श्रेष्ठ होंगे तो आप को संसार की कोई भी वस्तु कभी दुखी नहीं कर पायेगी। और जब आप को संसार की किसी बात का फर्क पड़ना बंद हो जायेगा तो निश्चित ही आप वैराग्य की और अग्रसर हो जायेगे और तब ईश्वर को पाना सरल हो जायेगा।इस कथा को सफल बनाने में प्रमुख यजमान परिवार समाजसेवी श्री प्रदीप बंसल, कांता बंसल,संजय अग्रवाल अनिता अग्रवाल, शरद अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल,राजेश अग्रवाल,पवन लोधा,शंकर अग्रवाल, रोहित अग्रवाल,शरद दुदानी, निरंजन अग्रवाल,अनुप सरिया,सुनिल सरिया,सुरेश सरिया,प्रदीप अग्रवाल ,प्रदीप साव धनंजय सुरेश भगत,भोला गुप्ता, विवेकानंद पांडे,संतोष पाठक,नारायण चन्द्र सेन, गौर दास,संदीप विश्वकर्मा,कैलाश भगत,संतोष पाठक,दीपक पांडे,अशोक गुप्ता,मोहन बंसल, प्रकाश विश्वकर्मा,आदि समस्त गोविंदपुर नगरवासियों के सहयोग से किया जा रहा है।

 

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