
मनुष्य को सुख की प्राप्ति होती है तो कहता है कि यह मेरी महनत का फल है और वहीं जब दुःख जीवन में प्रवेश करता है तो कहते हैं कि यह सब भगवान की गलती है। मनुष्य को सब कुछ भगवान पर छोड़ देना चाहिए क्योंकि मानव को उसके कर्मों का ही फल मिलता है। मनुष्य जब सच्चे भाव से भगवान की पूजा करते हैं तो भगवान को वह मजबूरन स्वीकार करनी पड़ती है।

अगर मनुष्य सुखी जीवन जीना चाहता है तो मनुष्य को सत्य, ख़ुशी, करुणा, दया, ईश्वर के प्रेम करना सीखना होगा इसी कारण से ही मानव के जीवन में सुख आ सकता है। कलयुग का मनुष्य धर्म को बचाने के लिए आगे नहीं आते हैं केवल जीवन में दिखावा करते हैं। इस धरती पर धर्म होगा तो यह धरती बचेगी क्योंकि भगवान भी धरती पर धर्म की रक्षा करने के लिए ही आये थे।

भगवान मनुष्य को सत्कर्म करने के लिए भेजते हैं। अपने कल्याण की चिंता स्वयं मनुष्य को करनी पड़ती है। कथा मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि जीवन जीने के लिए की जाती है और कथा सीधा मानव भगवान से मिला देती है।
मनुष्य के हर एक कर्म का लेखा-जोखा सब भगवान के पास होता है। मनुष्य भगवान को जिस दृष्टि से देखता है भगवान भी उसको उसी दृष्टि से देखते हैं जब मनुष्य कोई भी काम कर रहा है तो उसे एक बात सोचकर करनी चाहिए कि भगवान कि दृष्टि उस पर हमेशा बनी रहती है।
शास्त्रों में लिखा है अगर तुम धर्म की रक्षा करोगे तो धर्म भी तुम्हारी रक्षा करेगा। जो सनातन के लिए कुछ भी बोलेगा उसको सामने से मुँह तोड़ जवाब दिया जायेगा। मनुष्य अगर किसी को धर्मात्मा कहे या न कहे लेकिन भगवान की नज़र में मनुष्य को धर्मात्मा होना चाहिए। क्योंकि आज का मानव केवल दिखावे के लिए ही हिन्दू बना रह गया है। लेकिन कोई भी अपने श्री कृष्ण की मुक्ति के लिए नहीं बोलेगा और ना ही कोई अपने धर्म की रक्षा के लिए सामने आएगा। कलयुग का मनुष्य वही करता है जो मन में आता है। बुरा करने से मनुष्य के साथ बुरा ही होता है इसलिए मनुष्य को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि वह बुरी संगति में ना पड़ेजो व्यक्ति अपने जीवन को मानवता की सेवा में समर्पित कर दे, वही सच्चा सेवक है।
हर माँ बाप को अपने बच्चों को सीखाना चाहिए कि वह अपने बड़ो का सम्म्मान करें। गुरु, राजा, माता- पिता के अनुमति के बाद ही मनुष्य को अपना आसान ग्रहण करना चाहिए।
जो भी मनुष्य अपने से श्रेष्ठ पुरुषो के सामने आसान पर ऊपर बैठते है उनको जीवन में काफी दुःखों का सामना करना पड़ता है। भगवान राम की हर धर्म में पूजा होनी चाहिए।
हर सनातनी को अपने धर्म की रक्षा करनी चाहिए। आज कुछ लोग सत्ता की कुर्सी पाने के लिए समाज को बांटने की खतरनाक कोशिश कर रहे है जो कि समाज के लिए काफी हानिकारक है।
हर भारतीय युवा को भारत का इतिहास पढ़ना चाहिए। मनुष्य को अपने जीवन में जातियों में नहीं बांटना चाहिए।
जो व्यक्ति अपने जीवन को मानवता की सेवा में समर्पित कर दे, वही सच्चा सेवक है।
मनुष्य का एक ही कर्म व धर्म है और वह है मानवता। हम इस दुनिया में इंसान बनकर आए हैं तो सिर्फ इसलिए कि हम मानव सेवा कर सकें। भगवान बार-बार धर्म की रक्षा करने के लिए धरती पर आते है तो मनुष्य को भी अपने धर्म की रक्षा करनी चाहिए।
सत्संग को सुनने से मनुष्य को सत्य का बोध होता है, जिन लोगो के जीवन में सत्संग नहीं होता है उनका जीवन पत्थर के समान होता है।
भगवान ने धर्म की रक्षा सतयुग, त्रेतायुग, द्वापर युग में किया था वही भगवान कलयुग में भी धर्म की रक्षा करेंगे।
संसार में मनुष्य का भगवान के सिवा कोई नहीं है इसलिए मनुष्य को भगवान की शरण में चले जाना चाहिए।इस कथा। को सफल बनाने में।इस कथा को सफल बनाने में प्रमुख परिवार किशोरी गुप्ता, कस्तूरी देवी अशोक कुमार वर्मा गीता देवी,विनय कृष्ण गुप्ता, अल्का देवी,संजय चौधरी,सुमन चौधरी , केडिया परिवार बिजय झा शिवानी झा अवधेश प्रसाद गुप्ता मनिषा देवी, हिम्मत सिंह,सुमन देवी,,, बिकास साहू,सुशील खैतान माया खैतान, राजेश चौखानी,संजय गुप्ता टुटू शर्मा,आदि समाज के सभी के सहयोग से किया जा रहा है।
16/12/2024 पुरणाहुती हवन,महाप्रसाद भंडारा किया जाएगा 3 बजे से प्रभू इच्छा तक।
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