
चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम के उप विकास आयुक्त (DDC) श्री उत्कर्ष कुमार ने समाहरणालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान जिले में चल रही विकास योजनाओं की धीमी प्रगति पर कड़ी नाराजगी जताई है। बैठक में मुख्य रूप से 15वें वित्त आयोग, मनरेगा और आवास योजनाओं की प्रखंडवार समीक्षा की गई।

ऑडिट और ज्ञान केंद्र पर सख्त निर्देश:

डीडीसी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) को कड़ा निर्देश दिया कि पंचायतों का ऑडिट कार्य 26 फरवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। साथ ही, जिन छह प्रखंडों में ‘ज्ञान केंद्र’ के लिए राशि आवंटित की जा चुकी है, वहां जल्द से जल्द निर्माण पूरा कर फोटोग्राफ उपलब्ध कराने को कहा गया है।
नोआमुंडी बीडीओ से स्पष्टीकरण:
समीक्षा के दौरान पाया गया कि नोआमुंडी प्रखंड में 15वें वित्त आयोग की आबद्ध निधि (Tied Fund) के व्यय की स्थिति सबसे खराब है। इस पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए डीडीसी ने संबंधित बीडीओ से स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश दिया। उन्होंने सभी अधिकारियों को चेतावनी दी कि एक सप्ताह के भीतर योजनाओं का प्लान तैयार कर अधिकतम व्यय सुनिश्चित करें।
मनरेगा और आवास योजनाएं:
मनरेगा के तहत श्रमिकों के ई-केवाईसी, 100 दिनों के रोजगार की गारंटी और बिरसा सिंचाई कूप जैसी योजनाओं को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया। वहीं, अबुआ आवास और प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए डीडीसी ने कहा कि लंबित योजनाओं को शीघ्र भौतिक रूप से पूर्ण कराएं, अन्यथा व्यय की गई राशि की नियमानुसार वसूली की जाएगी।
बैठक में डीआरडीए निदेशक सुनीला खालको, जिला पंचायती राज पदाधिकारी सविता टोपनो सहित कई प्रखंडों के बीडीओ और तकनीकी सहायक उपस्थित थे।
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