
कलियासोल (धनबाद): प्रखंड के पात्थर कुआँ पंचायत अंतर्गत बड़बाड़ी आदिवासी टोला में आज ‘करम विनती’ का पर्व पारंपरिक हर्षोल्लास और भक्तिपूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाओं और पुरुषों ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों को याद करते हुए पूजा-अर्चना की।

गुरु वंदना और नगर कीर्तन

पर्व की शुरुआत बेहद भावुक और श्रद्धामय रही। आदिवासी समाज की महिलाओं ने अपनी परंपरा के अनुरूप सबसे पहले अपने गुरु के चरण पखारे। इसके पश्चात, ढोल-नगाड़ों की थाप पर गुरु को सम्मानपूर्वक पूजा स्थल तक ले जाया गया। इस दौरान पूरे गांव में भव्य नगर कीर्तन निकाला गया, जिसमें समुदाय के लोग थिरकते और अपनी संस्कृति का जयघोष करते नजर आए.
सनातन और प्रकृति का जुड़ाव
कार्यक्रम के दौरान आदिवासी गुरु ने पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे सनातन परंपराओं से जोड़कर बताया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हिंदू धर्म में विभिन्न देवी-देवताओं की उपासना की जाती है, उसी श्रद्धा भाव से आदिवासी समाज भी अपनी जड़ों और ईश्वर की आराधना करता है।
उन्होंने पौराणिक संदर्भ देते हुए बताया:
”जब पृथ्वी जलमग्न थी, तब भगवान विष्णु ने कच्छप (कछुआ) अवतार लेकर सागर से पृथ्वी को बाहर निकाला था। हमारे पूर्वज और गुरु मोरंगों ने आदिवासियों को सही मार्ग दिखाने का कार्य किया। आज का यह नगर कीर्तन और पूजा उन्हीं गुरुओं और ईश्वरीय शक्ति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का जरिया है।”
सांस्कृतिक एकता का संदेश
गांव की गलियों से गुजरते हुए कीर्तन मंडली ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय कर दिया। ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह के आयोजनों से न केवल नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है, बल्कि समाज में आपसी भाईचारा और एकता भी बढ़ती है।
संवाददाता: नरेश विश्वकर्मा
स्थान: कालूबथान
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