
आठ अगस्त 1987 का दिन था। निर्मल महतो, ज्ञानरंजन, सूरज मंडल अपने कुछ सहयोगियों के साथ चमरिया गेस्ट हाउस की सीढ़ी से उतर रहे थे। सीढ़ी से उतरते समय निर्मल महतो को धीरेंद्र सिंह उर्फ पप्पू ने सामने से और वीरेंद्र सिंह ने पीछे से गोली मारी। गोली लगते ही निर्मल महतो वहीं गिर पड़े।

जमशेदपुर: वर्ष 1987 में आज ही के दिन झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेता निर्मल महतो की हत्या जमशेदपुर में कर दी गयी । उनके शहादत दिवस पर आज गुरुवार को कदमा के उलियान में महा जुटान होगा जहां मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन पहुंचेगें और सभा को सम्बोधित करेंगे

आज यानी आठ अगस्त को निर्मल महतो जमशेदपुर में शहीद हुए थे उनकी आज ही के दिन हत्या कर दी गयी थी ।वर्ष था 1987 !

जमशेदपुर में अवतार सिंह तारी की मां का श्राद्धकर्म था। उस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए सात अगस्त को ही निर्मल महतो, ज्ञानरंजन, सूरज मंडल और बाबूलाल सोय रांची से जमशेदपुर आ गये थे। उन लोगों के ठहरने की व्यवस्था चमरिया गेस्ट हाउस में की गयी थी। दो कमरे बुक हुए थे। कमरा नंबर एक सूरज मंडल और कमरा नंबर दो ज्ञान रंजन के नाम से बुक था। निर्मल महतो सूरज मंडल के साथ कमरा नंबर एक में ठहरे थे।
आठ अगस्त 1987 का दिन था। निर्मल महतो, ज्ञानरंजन, सूरज मंडल अपने कुछ सहयोगियों के साथ चमरिया गेस्ट हाउस की सीढ़ी से उतर रहे थे। सीढ़ी से उतरते समय निर्मल महतो को धीरेंद्र सिंह उर्फ पप्पू ने सामने से और वीरेंद्र सिंह ने पीछे से गोली मारी। गोली लगते ही निर्मल महतो वहीं गिर पड़े।
सूरज मंडल को भी अंगुली में गोली लगी। दोनों को जीप से एमजीएम ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने निर्मल को मृत घोषित कर दिया।
निर्मल महतो की हत्या की खबर पूरे राज्य में आग की तरह फैल गयी। हत्या के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा और आजसू के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आये। जमशेदपुर शहर बंद रहा। कई जगह पर तोड़फोड़ भी हुई। तीन दिनों के झारखंड बंद का आह्वान किया गया।
शिबू सोरेन भी जमशेदपुर पहुंच गये। बड़ी सभा हुई। निर्मल दा की शवयात्रा में एक लाख से अधिक लोग शामिल हुए। उन्हें जमशेदपुर शहर के उलियान कदमा में दफना दिया गया। निर्मल दा झारखंडियों के अरमानों में आज भी प्रकाशमान हैं।

हत्या की प्राथमिकी झामुमो के उस समय के बड़े नेता सूरज मंडल की शिकायत पर बिष्टुपुर थाना में दर्ज की गयी थी. संयुक्त बिहार के दौरान उनकी हत्या के विरोध में जमशेदपुर समेत पूरे प्रदेश में बवाल हुआ था। हत्या की जांच सरकार ने सीबीआइ को 18 नवंबर 1987 को सौंपी।
निर्मल दा की हत्या के मामले में धीरेंद्र सिंह, वीरेंद्र सिंह और नरेंद्र सिंह की गिरफ्तारी हुई थी।धीरेंद्र सिंह की गिरफ्तारी हत्या मामले में 11 साल बाद 2001 में और नरेंद्र सिंह की 2003 में हुई थी।जेल में ही गोलमुरी के गाढ़ाबासा निवासी वीरेंद्र सिंह की मौत हो गयी थी।
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