
*रांची :* मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के राज्यसभा जाने की अटकलें हैं। दो राज्यसभा सीटें खाली हो रही हैं, और महागठबंधन के पास .

काफी कम समय में ही विपरीत परिस्थितियों में राजनीति में आकर प्रभाव कायम करने वालीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन का अगला ठिकाना राज्यसभा हो सकता है।

राजनीतिक गलियारे में सुगबुगाहट है कि कल्पना सोरेन उच्च सदन का सदस्य बनकर झारखंड के मुद्दों को दिल्ली में उठाएंगी। हालांकि इसकी अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
गांडेय विधायक कल्पना सोरेन का राज्यसभा में जाना केवल एक व्यक्तिगत राजनीतिक उन्नयन नहीं होगा, बल्कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और राज्य की राजनीति पर इसके कई व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं।
कल्पना सोरेन को राज्यसभा भेजना पार्टी के भीतर एक नई नेतृत्व पंक्ति को स्थापित करने का संकेत होगा। इससे दिल्ली में पार्टी मजबूत होगी।
हेमंत सोरेन के साथ उनका उभरता राजनीतिक कद संगठनात्मक स्थिरता और भविष्य की रणनीति को मजबूती दे सकता है।
यह कदम पार्टी में परिवार और संगठन के संतुलन को भी साधेगा। राज्यसभा के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण में सीधी भागीदारी मिलती है।
कल्पना सोरेन यदि उच्च सदन में जाती हैं तो झारखंड से जुड़े आदिवासी, भूमि, खनिज और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों को राष्ट्रीय मंच पर अधिक प्रभावी ढंग से उठाया जा सकता है।
इसके अलावा उनका राज्यसभा पहुंचना महिला सशक्तिकरण और आदिवासी नेतृत्व दोनों दृष्टिकोण से एक मजबूत राजनीतिक संदेश होगा। इससे झामुमो को सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व की राजनीति में बढ़त मिल सकती है।
खाली हो रही है दो सीटें, आंकड़ा गठबंधन के पक्ष में
पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई सीट झामुमो के कोटे की है। वहीं भाजपा के राज्यसभा सदस्य दीपक प्रकाश का कार्यकाल भी इस वर्ष जून में समाप्त हो रहा है।
इस तरह राज्य की दोनों सीटों पर चुनाव होगा। विधानसभा के मौजूदा गणित के अनुसार सत्ताधारी महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं- झामुमो (34), कांग्रेस (16), राजद (चार) और भाकपा (माले) (दो)।
एक सीट जीतने के लिए 28 वोट की जरूरत होती है। ऐसे में गठबंधन यदि एकजुट रहता है तो दोनों सीटें आसानी से जीत सकता है। झामुमो दोनों सीटों पर दावा करेगा, प्रबल संभावना है।
झामुमो नेताओं का मानना है कि राज्यसभा में झारखंड की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाने के लिए झामुमो के प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
कांग्रेस के रुख पर रहेगी नजर
हालांकि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के रुख पर भी नजर रहेगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि अतीत में कई बार उन्होंने राज्यसभा सीटों को लेकर त्याग किया है, इसलिए इस बार एक सीट पर उनका स्वाभाविक अधिकार बनता है।
There is no ads to display, Please add some


Post Disclaimer
स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com
