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सरायकेला : टेंगाडीह विद्यालय में लापरवाही : दर्जनभर छात्र 8वीं बोर्ड परीक्षा से वंचित, जांच व कड़ी कार्रवाई की मांग ।

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Mar 19, 2026

 

 

सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह प्रखंड अंतर्गत उत्क्रमित मध्य विद्यालय टेंगाडीह में शिक्षकों की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। आरोप है कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा समय पर विद्यार्थियों का पंजीकरण नहीं कराए जाने के कारण लगभग एक दर्जन छात्र-छात्राएं इस वर्ष आयोजित 8वीं बोर्ड परीक्षा से वंचित रह गए।

 

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) द्वारा 2 मार्च को आयोजित परीक्षा में शामिल होने के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य था। किंतु विद्यालय के शिक्षकों द्वारा समय पर आवेदन जमा नहीं किए जाने के कारण संबंधित छात्रों के प्रवेश पत्र जारी नहीं हो सके, जिससे वे परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए।

 

 

इस घटना से प्रभावित छात्रों में चित्रा सिंह, उत्तम सिंह, प्रतिमा सिंह, उर्मिला दास, जीतवाहन सिंह, चंपारानी सिंह, प्रियंका मुर्मू, वनबिहारी सिंह, सुशील हांसदा, शुभम मांझी एवं मनोज सिंह शामिल हैं। परीक्षा से वंचित होने के कारण छात्रों एवं उनके अभिभावकों में गहरा आक्रोश और निराशा व्याप्त है।

 

 

अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विद्यालय में तीन सरकारी शिक्षक पदस्थापित होने के बावजूद इतनी बड़ी चूक अत्यंत चिंताजनक है। अभिभावक लखीराम सिंह ने बताया कि उनकी पुत्री प्रतिमा सिंह इस घटना से मानसिक रूप से आहत है।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिक्षा विभाग ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक सरसिज कुमार का वेतन अस्थायी रूप से रोकते हुए उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। प्रधानाध्यापक ने इसे तकनीकी समस्या बताते हुए विभाग को अपना पक्ष सौंप दिया है।

वहीं, टेंगाडीह पंचायत के मुखिया अर्जुन सिंह ने शिक्षकों को शिक्षण कार्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह देने की बात कही, हालांकि शिक्षा के अधिकार एवं अन्य योजनाओं में पंचायत की भूमिका पर उन्होंने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी।

स्थानीय संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषी शिक्षकों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। सरना सरहुल समिति से जुड़े पंचायत सचिव दिगंबर सिंह सरदार ने कहा कि इस प्रकार की लापरवाही ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है।

यह घटना शिक्षा व्यवस्था की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित विभाग इस मामले में कितनी पारदर्शिता और सख्ती के साथ कार्रवाई करता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


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