
सरायकेला: झारखंड आंदोलन के प्रमुख स्तंभ और वरिष्ठ समाजसेवी स्वर्गीय राजकिशोर महतो के श्राद्ध कर्म का समापन भावपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर उनके पुत्र सह झारखंड आंदोलनकारी सुनील कुमार महतो और जिला परिषद उपाध्यक्ष श्रीमती मधुश्री महतो ने अपने पूज्य पिताजी को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम के अंतिम दिन सामाजिक सरोकार निभाते हुए क्षेत्र के सैकड़ों बुजुर्गों और विधवा माताओं को भोजन कराया गया एवं नए वस्त्र प्रदान किए गए।

एक समर्पित जीवन का अंत
विदित हो कि राजकिशोर महतो का निधन बीते 26 फरवरी को हुआ था। उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी। स्वर्गीय महतो न केवल एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व थे, बल्कि उन्होंने झारखंड अलग राज्य आंदोलन में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई थी। उन्हें एक सरल, मिलनसार और ओजस्वी मार्गदर्शक के रूप में जाना जाता था, जिन्होंने अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ा है।
श्रद्धांजलि देने उमड़ा जनसैलाब
सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित इस श्राद्ध कार्यक्रम में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। शोक की इस घड़ी में परिवार को सांत्वना देने के लिए जिले के हजारों सामाजिक कार्यकर्ता, स्थानीय ग्रामीण, विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक पहुंचे। सभी ने स्वर्गीय महतो के चित्र पर पुष्प अर्पित कर अपनी गहरी संवेदना प्रकट की और आंदोलन में उनके योगदान को याद किया।
सेवा भाव के साथ विदाई
समाज के प्रति स्वर्गीय राजकिशोर महतो के समर्पण को जीवित रखते हुए, परिवार की ओर से अंतिम दिन सेवा कार्य का आयोजन किया गया। सुनील कुमार महतो और मधुश्री महतो ने स्वयं उपस्थित रहकर क्षेत्र की विधवा माताओं और बुजुर्गों को सम्मानपूर्वक भोजन कराया और वस्त्र बांटे।
“पिताजी का जीवन हमेशा दूसरों की मदद और समाज सेवा के लिए समर्पित रहा। उनके दिखाए मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।” — सुनील कुमार महतो व मधुश्री महतो
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