
चांडिल (सरायकेला): चांडिल प्रखंड क्षेत्र के ग्राम सभा तारकुआंग में सुरेंद्र सिंह की अध्यक्षता और गांव गणराज्य लोक समिति (कोल्हान) के संगठन संयोजक बृहस्पति सिंह सरदार की उपस्थिति में एक विशेष बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य PESA कानून 1996 की नियमावली और वन अधिकार कानून 2006 के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा करना था।

नियमावली में संशोधन की 12 सूत्री मांग

बैठक में ग्राम सभा ने वर्तमान नियमावली के कई बिंदुओं पर आपत्ति जताई और 12 प्रमुख संशोधनों का प्रस्ताव तैयार किया। मुख्य मांगों में ग्राम सभा सचिव को मुख्य सचिव का दर्जा देने, बैठक की कार्यवाही पंजी की मूल प्रति के बजाय छाया प्रति पंचायत ले जाने, और ‘चुनाव’ शब्द के स्थान पर पारंपरिक ‘चयन’ शब्द का उपयोग करने जैसे बिंदु शामिल हैं।
इसके अलावा, ग्रामीणों ने ग्राम सभा में पुलिस की भूमिका (नियम 23) का विरोध किया और मांग की कि नियम वन अधिकार कानून 2006 के अनुरूप होने चाहिए। झारखंड गजट 2007 और झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 की धाराओं को पारंपरिक ग्राम सभाओं पर थोपने का भी विरोध किया गया।
राष्ट्रपति और राज्यपाल को सौंपा जाएगा ज्ञापन
बृहस्पति सिंह सरदार ने बताया कि इन सभी मांगों और संशोधनों का एक ड्राफ्ट तैयार कर पारंपरिक अध्यक्षों (लाया, मुंडा, मांझी, महतो) के हस्ताक्षर के साथ महामहिम राष्ट्रपति और राज्यपाल को भेजा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी नियम बनने के एक साल तक ग्राम सभा को संशोधन की मांग करने का संवैधानिक अधिकार है।
आंदोलन की चेतावनी
बैठक में सामुदायिक वन अधिकार और वन संसाधनों पर दावा प्रपत्र (ख) और (ग) के लंबित होने पर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया। ग्रामीणों ने कहा कि अनुमंडल कार्यालय में आवेदन जमा करने के बावजूद अब तक निपटारा नहीं हुआ है। यदि समय सीमा के भीतर इसका निराकरण नहीं हुआ, तो ग्राम सभा उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।
इस बैठक में सुरेंद्र सिंह, शकुंतला सिंह, चिंतामणी सिंह, शुरूवाला सिंह, अनिता सिंह, उषा सिंह सरदार सहित बड़ी संख्या में ग्राम सभा सदस्य उपस्थित थे।
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