
आदरडीह के पांच मौजा के ग्रामीणों ने पूर्व उपमुखिया के बयानों का किया खंडन, बोले — लालच देकर धोखे से ली गई हमारी जमीन

सरायकेला-खरसावां : जिला के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के नीमडीह प्रखंड के

आदरडीह समेत पांच मौजा में प्रस्तावित एसएम स्टील कंपनी एंड पावर लि. प्रस्तावित स्थापना को लेकर जारी जमीन विवाद दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। जैसे-जैसे मामले की परतें खुल रही हैं, नए आरोप और कथित दलालों की भूमिका भी सामने आ रही है।
हाल ही में आदरडीह पंचायत के पूर्व उपमुखिया हाकुम कुमार और ग्रामप्रधान द्वारा आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा गया था कि “किसी का गर्दन पकड़कर जमीन नहीं लिया गया, अन्याय हुआ है, लेकिन किसी का पाँच रुपया नहीं खाया गया। इतना सस्ते में जमीन कहां मिलता है।”
इस बयान ने ग्रामीणों में आक्रोश पैदा कर दिया है।
बुधवार को आदरडीह, गौरीडीह, बनडीह, गौरडीह और सुंडीडीह — इन पांच मौजा के ग्रामीणों ने एक स्वर में उपमुखिया के इस बयान का खंडन करते हुए कहा कि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। ग्रामीणों के अनुसार, कई लोगों से लालच और झूठे वादों के जरिए जमीन रजिस्ट्री कराई गई, जबकि अधिकांश ग्रामीण शुरुआत से ही कंपनी स्थापना के खिलाफ थे।
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 95 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण जमीन देने के विरोध में हैं। ग्रामीणों ने उपायुक्त सरायकेला-खरसावां को ज्ञापन सौंपकर कंपनी की स्थापना रोकने की मांग की है।
आदरडीह पंचायत के मुखिया सुभाष सिंह के भाई युधिष्ठिर सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मुझे झूठे आश्वासन और भ्रमित जानकारी देकर जमीन बेचने पर मजबूर किया गया। अब जब सच सामने आ गया है, तो हम न्याय के लिए उच्च न्यायालय से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक जाएंगे।
ग्रामीणों ने जमीन का कागज़ दिखाते हुए दावा किया कि जिनसे जमीन ली गई, वह अब नीलांचल कंपनी को बेची जा चुकी है, जबकि अनुबंध कुछ और शर्तों पर किया गया था।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि टाटा स्टील विस्थापितों का उदाहरण सबके सामने है —
‘टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनी ने भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन आज वहां के विस्थापित परिवार न्याय से वंचित हैं। हम वही गलती नहीं दोहराएंगे। किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे।’
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने उनकी बातों पर संज्ञान नहीं लिया तो आंदोलन को जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी तक फैलाया जाएगा।
संवाददाता सम्मेलन में रूपसिंह सरदार (पारंपरिक ग्रामप्रधान), राज कुमार, शरत कुमार, अर्जुन सिंह, बिजय कुमार, शक्तिपद मंडल, हरिश्चंद्र सिंह, श्रीपति सिंह, युधिष्ठिर सिंह, रंजीत कुमार, मदन सिंह, अजय दास गोस्वामी, सुरेंद्र सिंह, तपन कुमार, दुर्योधन प्रमाणिक, आशीष कुमार, राजेन सिंह और जनार्दन सिंह मौजूद रहे।
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