सरायकेला – 1 अप्रैल, 2026 बुधवार को सरायकेला स्थित उत्कलमणि आदर्श पाठागार की ओर से आज गौरवमयी ‘उत्कल दिवस’ अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ओड़िया भाषा, संस्कृति और परंपरा को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पाठागार नाटक भवन में उत्कल गौरव मधुसूदन दास, उत्कलमणि गोपबंधु दास एवं राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के चित्रों पर माल्यार्पण कर किया गया। इसके पश्चात सभी सदस्यों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने उत्कलमणि गोपबंधु दास की आदमकद प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। समारोह के दौरान ओड़िया शिक्षकों एवं उपस्थित सदस्यों द्वारा ओड़िशा के गौरव का प्रतीक गान “वंदे उत्कल जननी” तथा “पथ एबे सरि नाहीं…” जैसे गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर वक्ताओं ने उत्कल दिवस के महत्व पर अपने विचार रखे और ओड़िया संस्कृति के संरक्षण पर जोर दिया। कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य इस गरिमामयी उत्सव में क्षेत्र के कई बुद्धिजीवी, शिक्षक और समाजसेवी उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से: सुशांत महापात्र, सुदीप पटनायक, जलेश कवि, कलहु महापात्र काशीनाथ कर, कार्तिक परीक्षा, दुखरम साहू, बद्रीनारायण दरोगा शिक्षिकाएं: रीता रानी नंदा, अर्चना दास, संध्या कर, गीतांजलि महंती, रश्मिता दास शिक्षक: शक्ति पति, रूपम राणा, दुखनू कर, चक्रधर महान्ती कार्यक्रम में काफी संख्या में ओड़िया भाषी लोग उपस्थित थे, जिन्होंने अपनी मिट्टी और भाषा के प्रति अटूट प्रेम प्रदर्शित किया। There is no ads to display, Please add someadminLike this:Like Loading... Related Post Disclaimerस्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com Post navigation त्रिशानु राय ने एटीएम कार्ड को शाखा प्रबंधक को सौंपा सरायकेला नगर में धूमधाम से मनाया गया उत्कल दिवस