• Wed. Mar 18th, 2026

संसद से संसदीय क्षेत्र तक, 2030 तक बाल विवाह के खात्मे के लिए एकजुट हुए सांसद

admin's avatar

Byadmin

Mar 18, 2026

 

विभिन्न दलों के 20 से अधिक सांसद ‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ के बैनर तले 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य के लिए एकजुट हुए।

 

* ‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ की पहल को जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का समर्थन हैं, जो बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों का देश का सबसे बड़ा नेटवर्क है।

 

* तेलुगु देशम पार्टी के संसदीय दल के नेता लावू श्रीकृष्ण देवरायालु सहित सभी सांसदों ने बच्चों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर प्रगतिशील और उम्र के अनुरूप प्रतिबंध लागू करने की भी मांग की।

 

एक नायाब और मजबूत पहल में 2030 तक भारत को बाल विवाह से मुक्त करने की रणनीति तय करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी के कांस्टीट्यूशन क्लब में एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन के बैनर तले विभिन्न राजनीतिक दलों के 20 से ज्यादा सांसद एक साथ जुटे। बाल विवाह और सोशल मीडिया से जुड़े खतरों को बच्चों के लिए बड़ी चुनौती करार देते हुए सांसदों ने इन मुद्दों को आगे लाने के लिए शून्य काल का इस्तेमाल, निजी विधेयक लाए जाएं और अपने संसदीय क्षेत्रों में इसे मजबूती से उठाया जाए।

 

‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ की शुरुआत 17 नवंबर 2024 को हुई थी और बाल विवाह एवं बाल यौन शोषण पर चिंता जताते हुए 38 सांसदों ने इसका समर्थन किया। इसे ‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ का समर्थन प्राप्त है, जो बाल अधिकारों के संरक्षण का देश का नागरिक समाज संगठनों का सबसे बड़ा नेटवर्क है। इसके 250 से ज्यादा सहयोगी संगठन देश के 450 से अधिक जिलों में काम कर रहे हैं।

 

‘डायलॉग विद पार्लियामेंटेरियंस ऑन अचीविंग चाइल्ड फुल पोटेंशियल’ में बोलते हुए तेलुगु देशम पार्टी के नेता और ‘एमपी’ज फ़र चिल्ड्रेन’ के संयोजक लावू श्रीकृष्ण देवरायलु ने कहा, “बाल विवाह किसी एक पार्टी या धर्म का मुद्दा नहीं है। इसे खत्म करने पर सभी दलों में आम सहमति है। भारत ने दिखाया है कि जब भी हम सामूहिक संकल्प के साथ काम करते हैं, हमने नतीजे हासिल किए हैं। हमने पोलियो खत्म किया, बच्चों को स्कूल तक पहुंचाया। कोई वजह नहीं कि उसी संकल्प के साथ हम 2030 तक बाल विवाह का खात्मा नहीं कर पाएं।”

 

तेलुगु देशम पार्टी के संसदीय दल के नेता देवरायलु ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर उम्र के आधार पर रोक लगाने की जरूरत बताई। उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम (पीसीएमए), 2006 को मजबूत बनाने के लिए हाल ही में लोकसभा में एक निजी विधेयक पेश किया। बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए इस विधेयक में सख्त सजा, विशेष बाल विवाह निषेध अधिकारी, विशेष अदालतें और एक डिजिटल रिपोर्टिंग पोर्टल का प्रावधान है।

 

समर्थन के लिए सभी सांसदों का आभार जताते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक भुवन ऋभु ने कहा, “हम एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन फोरम को उनके नेतृत्व के लिए धन्यवाद देते हैं और इस बात की सराहना करते हैं कि उन्होंने संसद तथा संबंधित सरकारी एजेंसियों के भीतर बाल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया। बाल संरक्षण केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय प्राथमिकता है। बच्चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों ही तरह के खतरों से सुरक्षित रखना राष्ट्र निर्माण की बुनियादी शर्त है।” भुवन ऋभु ने आगे कहा, “हम सांसदों के आभारी हैं कि उन्होंने इस बात पर सहमति जताई कि भारत सरकार को ‘बाल विवाह मुक्त भारत दिवस’ घोषित करना चाहिए। एक राष्ट्रीय दिवस की घोषणा न केवल इस अपराध के खात्मे की तात्कालिकता को रेखांकित करेगी, बल्कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी बच्चा विवाह के लिए मजबूर न हो, पूरी सरकार और पूरे समाज; दोनों की साझा जवाबदेही को भी सुदृढ़ करेगी।”

 

‘एमपी’ज फॉर चिल्ड्रेन’ संवाद में अन्य सांसदों में भीम सिंह (भाजपा), डॉ. धर्मवीर गांधी (कांग्रेस), राजा राम सिंह कुशवाहा (सीपीआई एमएल), लुंबा राम चौधरी (भाजपा), पुष्पेंद्र सरोज (सपा), जोथिमानी (कांग्रेस), डग्गुमल्ला प्रसाद राव (टीडीपी), गजेंद्र पटेल (भाजपा), जॉन ब्रिटास (सीपीएम), अरुण नेहरू (डीएमके), छोटेलाल खरवार (सपा), इक़रा चौधरी (सपा), जुगल किशोर शर्मा (भाजपा), महुआ माजी (जेएमएम), संगीता बलवंत (भाजपा), विजयलक्ष्मी देवी (जनता दल (यूनाइटेड), वी. शिवदासन (सीपीआई), पी. वी. अब्दुल वहाब (इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग), बीधा मस्थान राव यादव (टीडीपी) और कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी (भाजपा) शामिल थे।

 

जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन ने बाल विवाह के खिलाफ भारत सरकार के 100 दिन के गहन जागरूकता अभियान को मजबूती देने के लिए बाल विवाह मुक्ति रथ निकाले थे। पहियों पर चलने वाले इस अभियान को इस तरह से तैयार किया गया था कि यह गांवों और जनसमुदाय तक बाल विवाह के खिलाफ संदेश को सीधा उन तक पहुंचा सके। देश के 28 राज्यों और 439 जिलों में 500 से ज्यादा रथ निकाले गए। इस अभियान में 104 से ज्यादा सांसदों ने अपने क्षेत्रों में रथ यात्रा का नेतृत्व किया या उसे रवाना किया। इसके अलावा दो मुख्यमंत्रियों, तीन उपमुख्यमंत्रियों, तीन विधानसभा अध्यक्षों, तीन उपाध्यक्षों, 49 राज्य मंत्रियों, 154 विधायकों और 99 जिला कलेक्टरों ने भी अलग-अलग जिलों में बाल विवाह मुक्ति रथों को हरी झंडी दिखाई।

 

 


There is no ads to display, Please add some
Post Disclaimer

स्पष्टीकरण : यह अंतर्कथा पोर्टल की ऑटोमेटेड न्यूज़ फीड है और इसे अंतर्कथा डॉट कॉम की टीम ने सम्पादित नहीं किया है
Disclaimer :- This is an automated news feed of Antarkatha News Portal. It has not been edited by the Team of Antarkatha.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *