
लखीसराय-रविवार 11 जनवरी 2026 को श्रृंगी ऋषि महोत्सव की शुरुआत हुई और जिसके गवाह हजारों लोग बने। इस दौरान आदिवासी समुदाय के लोगों ने अपने शब्दों में गीत गाकर लोगों का अभिवादन किया। इस दौरान बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि माघ मास की महा अष्टमी के पावन अवसर पर आयोजित श्रृंगी ऋषि महोत्सव का शुभारंभ संत शिरोमणि, रामकथा वाचक मुरारी बापू के मुखारविंद से होना इस आयोजन को और भी पवित्र बनाता है। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संगम के कारण लखीसराय जिला आज अपनी एक अलग पहचान बना चुका है और यह उनके लिए गर्व की बात है कि उनका जन्म इसी पावन धरती पर हुआ। उपमुख्यमंत्री ने अपनी राजनीतिक यात्रा को याद करते हुए कहा कि 1970 के दशक में तिलकपुर ग्राम के नरेश बाबू के मार्गदर्शन में उन्होंने सूर्यगढ़ा क्षेत्र से राजनीति में प्रवेश किया, जिसके बाद उन्हें लखीसराय जिले में कार्य करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि पथ निर्माण मंत्री के रूप में कार्य करते हुए रामपुर से बाबा श्रृंगी ऋषि धाम तक सड़क निर्माण की स्वीकृति दी गई, जिससे इस क्षेत्र में पर्यटन का पहला द्वार खुला।
उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक पुनर्जागरण के उद्देश्य से राज्य के विभिन्न जिलों में महोत्सवों की शुरुआत की गई, उसी क्रम में लखीसराय जिले के लिए श्रृंगी ऋषि महोत्सव की घोषणा की गई। उन्होंने बताया कि पहले लखीसराय जिले में कोई बड़ा महोत्सव नहीं होता था, लेकिन कला, संस्कृति एवं युवा विभाग में सेवा का अवसर मिलने पर उन्होंने जिले में सात महोत्सवों की घोषणा की।

इन महोत्सवों में बाबा इंद्रमनेश्वर महादेव अशोक धाम महोत्सव, मां बाला त्रिपुर सुंदरी बढ़हिया धाम महोत्सव, जालप्पा स्थान महोत्सव, लाल पहाड़ी महोत्सव, किऊल महोत्सव, लखीसराय महोत्सव और श्रृंगी ऋषि महोत्सव शामिल हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि लखीसराय की सात प्रमुख धरोहरें इस क्षेत्र को गौरवान्वित करती हैं। इनमें लाल पहाड़ी विशेष महत्व रखती है, जहां भगवान बुद्ध के आगमन का ऐतिहासिक प्रमाण मिलता है।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इसी धरती पर भगवान राम के आगमन से जुड़ा महायज्ञ हुआ था, जिसकी अगुवाई ऋषि श्रृंगी ने की थी। राजा दशरथ द्वारा पुत्र प्राप्ति के लिए जब महर्षि वशिष्ठ से यज्ञ की चर्चा हुई, तब उन्होंने ऋषि श्रृंगी को ही इस यज्ञ के लिए सक्षम बताया। इसी प्रसंग से श्रृंगी ऋषि धाम की गौरव गाथा प्रचलित हुई। उन्होंने सतसंडा पहाड़, जहां चतुर्भुज भगवान विष्णु का अद्भुत स्वरूप विद्यमान है, घोसी कुंडी पहाड़, बिछवे, नए बाल गुदर टीलहा और नौनगढ़ जैसी पौराणिक व ऐतिहासिक धरोहरों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सिमरिया महोत्सव की शुरुआत भी उनके द्वारा की गई थी। प्रभारी मंत्री रहते हुए वहां मुरारी बापू का कार्यक्रम आयोजित हुआ था।
उन्होंने कहा कि सिमरिया धाम से उत्तरायण गंगा की जलधारा बाबा इंद्रमनेश्वर, अशोक धाम, मां बाला त्रिपुर सुंदरी बढ़हिया धाम, श्रृंगी ऋषि धाम और जालप्पा स्थान धाम तक एक आध्यात्मिक श्रृंखला का निर्माण करती है, जो देश-दुनिया को नई ऊर्जा प्रदान करेगी और क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाएगी। पौराणिक कथाओं में वर्णित श्रृंगी ऋषि धाम आस्था, विश्वास और भक्ति का महान केंद्र रहा है और भविष्य में भी बना रहेगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि जंगली और पहाड़ी क्षेत्रों से घिरा बाबा श्रृंगी ऋषि धाम एक रमणीक, आध्यात्मिक और पौराणिक स्थल है, जिसका संबंध त्रेता युग से है। यह स्थल अयोध्या के राजा दशरथ और भगवान श्रीराम सहित उनके चारों पुत्रों से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि बौद्ध सर्किट से जुड़ने के साथ-साथ राम सर्किट से इस धाम को जोड़ने की पहल की गई है। इसी उद्देश्य से श्रृंगी ऋषि महोत्सव की घोषणा की गई। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ द्वारा किए गए यज्ञ के बाद भगवान राम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ और सनातन परंपरा के अनुसार जहां पुत्र की कामना की जाती है, वहीं मुंडन संस्कार भी किया जाता है। इसी धरती पर भगवान राम सहित उनके भाइयों का मुंडन संस्कार हुआ था।
उन्होंने कहा कि आज भी बाबा श्रृंगी ऋषि धाम की विशेषता बनी हुई है। संतान प्राप्ति और अन्य मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं। ऋषि श्रृंगी पुत्रकामेष्टि यज्ञ के महान विशेषज्ञ थे और उन्होंने राजा दशरथ को अश्वमेध यज्ञ एवं पुत्रकामेष्टि यज्ञ संपन्न कराया था। उन्हें विभांड ऋषि का पुत्र और कश्यप ऋषि का पौत्र माना जाता है। उपमुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि “विकास भी और विरासत भी” को साकार किया जा रहा है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में सुलभ मार्गों के निर्माण के साथ-साथ सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी सशक्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का नेतृत्व केवल आर्थिक सुधारों या अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा और आध्यात्मिक विरासत को सम्मान देने का भी प्रतीक है।
इस पावन अवसर पर सूर्यगढ़ा के विधायक रामानंद मंडल, पूर्व विधायक प्रहलाद यादव, जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र, एडीएम नीरज कुमार, जिला परिषद अध्यक्षा अंशु कुमारी, शशि कुमार, महिला आयोग की सदस्य पिंकी कुशवाहा, भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक कुमार, पूर्व जिला अध्यक्ष देवानंद साह, मदन मंडल, जिला परिषद सदस्या चुनचुन देवी, बढ़हिया नगर परिषद अध्यक्षा बेबी देवी, कजरा भाजपा मंडल अध्यक्ष विजय सिंह, जयशंकर पांडेय, हिमांशु कुमार, अमित कुमार, सीताराम बाब, सकलदेव बिंद एवं मुखिया जुली देवी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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