
रिपोर्टर: अमित चौहान

लोयाबाद। लोयाबाद थाना क्षेत्र की एकड़ा नदी में भूधंसान और दरार पड़ने की खबर मीडिया में आने के बाद, बुधवार को बीसीसीएल पीबी एरिया प्रबंधन तुरंत मौके पर पहुंचा और अस्थायी मरम्मत का कार्य शुरू करा दिया।

अस्थायी उपाय: फिलहाल, नदी के बहाव को बालू की बोरियों से मोड़ा जा रहा है। इसके बाद दरार वाले हिस्से पर आरसीसी (Reinforced Cement Concrete) करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
अधिकारियों का मत: अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह उपाय केवल कुछ दिनों की राहत ही देगा। स्थायी समाधान आईआईटी-आईएसएम (IIT-ISM) की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही तय होगा।
🏭 भूधंसान की मुख्य वजह
निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों ने भूधंसान की मुख्य वजह बताते हुए कहा:
यह पूरा इलाका पुरानी भूमिगत खदानों का है, जहाँ वर्षों पहले कोयला उत्पादन हुआ था, जिससे नीचे की जमीन खोखली हो चुकी है।
नदी का पानी लगातार भीतर रिसता रहा, जिससे जमीन कमजोर होकर धंसती गई। इसी कारण नदी में बार-बार दरारें और भूधंसान की घटनाएं हो रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप: ब्लास्टिंग से बढ़ी मुसीबत
एकड़ा हरिजन बस्ती के ग्रामीणों ने इस समस्या के लिए पास में चल रही आउटसोर्सिंग सिंह नेचुरल कंपनी को जिम्मेदार ठहराया है।
हेवी ब्लास्टिंग: ग्रामीणों ने भारी नाराज़गी जताते हुए आरोप लगाया कि कंपनी द्वारा लगातार की जा रही हेवी ब्लास्टिंग ने स्थिति को और भी खराब कर दिया है।
दरारें हर जगह: ग्रामीणों के अनुसार, नदी ही नहीं, बल्कि घरों, मंदिरों और स्कूलों की दीवारों में भी दरारें साफ दिखाई देती हैं।
🏠 पुनर्वास में भेदभाव का आरोप
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार सिजुआ एरिया प्रबंधन को आवेदन और मौखिक शिकायत देकर सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग की है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
रैयती जमीन का मुद्दा: स्थानीय लोगों का कहना है कि उनकी जमीन रैयती है, फिर भी उनकी सुरक्षा और समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
दलित परिवार: बस्ती में ज्यादातर दलित परिवार रहते हैं, और उनका आरोप है कि इसी वजह से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
पुनर्वास के लिए ठोस कदम न उठाए जाने से स्थानीय लोगों में काफी रोष है।
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