
सरायकेला जिले के छोटे से गांव रापचा के रहने वाले दिव्यांग आदिवासी छात्र लखन महाली ने अपनी असाधारण प्रतिभा और अटूट दृढ़ संकल्प से देशभर में मिसाल कायम की है। दोनों हाथों में गंभीर विकलांगता के बावजूद, लखन ने जेईई मेन्स परीक्षा में ST/SC-PWD कैटेगरी में देशभर में दूसरा स्थान हासिल कर, देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस जैसे चुनौतीपूर्ण कोर्स में दाखिला प्राप्त किया है। यह उपलब्धि लाखों छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

लखन के माता-पिता ठेकेदारी में मजदूरी करके अपने चार बच्चों का पालन-पोषण करते हैं। सबसे बड़े लखन ने बचपन से ही पढ़ाई में अपनी लगन और मेधा का परिचय दिया। शुरुआती दिनों में विकलांगता के कारण उन्हें पेन पकड़ने में भी दिक्कत होती थी और हाथों में असहनीय दर्द होता था, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

लखन ने टेक्नोलॉजी को अपना हथियार बनाया और डिजिटल टूल्स की सहायता से अपनी पढ़ाई जारी रखी, जो उनकी सफलता में महत्वपूर्ण साबित हुआ।
आज, लखन को आईआईटी दिल्ली में कंप्यूटर साइंस प्रोग्राम में प्रवेश मिल चुका है, जो उनकी कड़ी मेहनत और दृढ़ निश्चय का प्रमाण है। उनकी यह कामयाबी यह साबित करती है कि अगर हौसले बुलंद हों तो कोई भी शारीरिक बाधा या आर्थिक स्थिति आपकी मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। रापचा जैसे एक साधारण गांव से निकलकर देश के शीर्ष तकनीकी विश्वविद्यालय तक का यह सफर सिर्फ एक छात्र की व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि पूरे झारखंड और आदिवासी समाज के लिए गौरव का प्रतीक है। लखन महाली ने यह सिद्ध कर दिया है कि हौसले हों तो हालात मायने नहीं रखते।
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