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रन फॉर गजराज’ मैराथन पर विवाद: मुखिया ने वन विभाग पर लगाया आदिवासी-स्थानीय लोगों की उपेक्षा का आरोप

Byadmin

Oct 5, 2025

 

सरायकेला: दलमा तराई क्षेत्र के चांडिल प्रखंड अंतर्गत भादुडीह पंचायत के मुखिया बुड्ढेश्वर बेसरा ने ‘रन फॉर गजराज’ दलमा मैराथन के आयोजन को लेकर वन विभाग पर गंभीर पक्षपात और स्थानीय लोगों की उपेक्षा का आरोप लगाया है।

मुखिया बेसरा ने चाकुलिया मोड़ पर संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर कहा कि यह आयोजन दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी के गजराजों (हाथियों) और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन इसमें स्थानीय आदिवासी और अन्य लोगों की घोर उपेक्षा की गई।

मुखिया बुड्ढेश्वर बेसरा के मुख्य आरोप

जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा: उन्होंने बताया कि दलमा इको सेंसिटिव जोन के अंतर्गत आने वाले पंचायतों के मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधियों को भी इस आयोजन में नहीं बुलाया गया।

आदिवासियों की उपेक्षा: चूंकि पाँचवी अनुसूची क्षेत्र में सभी मुखिया आदिवासी हैं, इसलिए इसे वन विभाग द्वारा आदिवासियों के साथ घोर उपेक्षा करार दिया गया।

विरोध की चेतावनी: उन्होंने कहा कि दलमा अंचल के अंतर्गत आने वाले गांवों के आदिवासी और अन्य लोग वन विभाग की इस “मनमानी” का जोरदार विरोध करेंगे।

मैराथन का आयोजन और विजेता

झारखंड सरकार के वन विभाग और जलवायु परिवर्तन विभाग तथा टाटा स्टील जूलोजिकल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को 16 किलोमीटर की ‘रन फॉर गजराज’ दलमा मैराथन का आयोजन किया गया था।

प्रतिभागी: इसमें झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा और बंगाल से 4,200 प्रतिभागी शामिल हुए।

विजेता: मैराथन में उत्तर प्रदेश के धावकों का दबदबा रहा। महिला और पुरुष वर्ग की 12 में से 10 श्रेणियों पर अन्य राज्य के प्रतिभागियों ने जीत हासिल की।

पुरुष वर्ग में प्रथम: रवि कुमार पाल (लखनऊ, उत्तर प्रदेश)

महिला वर्ग में प्रथम: अंशिका पटेल (बनारस, उत्तर प्रदेश)

झारखंड का स्थान: पुरुष वर्ग में सातवां स्थान बबलू सिंह ने प्राप्त किया।

विजेताओं पर ‘छल प्रपंच’ का आरोप

काठजोड़ गांव के ग्राम प्रधान आनंद सिंह ने भी वन विभाग की नीति पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए:

उन्होंने कहा कि मैराथन में अन्य राज्य के प्रतिभागियों को “छल प्रपंच” कर विजयी बनाया गया।

जब यह कार्यक्रम दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी के हाथी और जंगल की सुरक्षा के उद्देश्य से था, तो इसमें मुख्य रूप से दलमा जंगल पड़ने वाले चांडिल, नीमडीह, बोड़ाम और पटमदा प्रखंड के प्रतिभागियों को शामिल करना सुनिश्चित किया जाना चाहिए था।

उन्होंने अन्य राज्य और झारखंड के अन्य प्रखंडों के प्रतिभागियों को शामिल करने को सरासर गलत बताया और वन विभाग की इस दोहरी नीति का जोरदार विरोध करने की चेतावनी दी।

 

 

 


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