
निरसा (संवाददाता, नरेश विश्वकर्मा): निरसा क्षेत्र के मुगमा एरिया अंतर्गत हरियाजाम 27/28 इंकलाइन में इन दिनों सरकारी संपत्ति की सरेआम लूट मची है। विडंबना यह है कि जिस ‘काले हीरे’ की रक्षा की जिम्मेदारी कोलियरी प्रबंधन की है, वही रक्षक आज कान में तेल डालकर सोए हुए हैं।

प्रबंधन की संदिग्ध भूमिका

कोयले के असली पहरेदार कौन हैं? यह किसी से छिपा नहीं है। केंद्र से लेकर राज्य सरकार तक यह जानती है कि कोलियरी के एजेंट और मैनेजर का प्राथमिक दायित्व उत्पादन के साथ-साथ उसकी सुरक्षा करना भी है। लेकिन धरातल पर स्थिति इसके ठीक विपरीत है।
ग्रामीणों द्वारा धड़ल्ले से कोयला चोरी किया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी खामोश तमाशबीन बने हुए हैं। मुगमा एरिया के शीर्ष अधिकारी, यानी महाप्रबंधक (GM) की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। क्या जीएम साहब को इस विशाल लूट की जानकारी नहीं है, या फिर इसे जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?
मिलीभगत का खेल और सुरक्षा में सेंध
ईसीएल (ECL) के सुरक्षा गार्डों पर कोयले की रखवाली का जिम्मा है, लेकिन चोरी पर लगाम लगाने में वे पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। स्थानीय चर्चा है कि कहीं न कहीं प्रबंधन और सुरक्षा घेरे में बैठे लोग ग्रामीणों से सांठगांठ कर, चंद रुपयों के लालच में इस सरकारी संपत्ति को लुटवा रहे हैं। ग्रामीण इसे ‘पेट की आग’ बताते हैं, लेकिन इसके पीछे का सिंडिकेट करोड़ों के राजस्व को चूना लगा रहा है।
मार्च का ‘टारगेट’ और बाकी साल ‘लूट’
आरोप है कि मुगमा एरिया के एजेंट और मैनेजर वित्तीय वर्ष के अंत में, यानी मार्च महीने में मुस्तैद होने का ढोंग करते हैं। उस समय केवल फाइलों और पत्थरों के दम पर उत्पादन को नंबर वन दिखाकर पुरस्कार पाने की होड़ मची रहती है। लेकिन बाकी के 11 महीने कोयला चोरी का खुला खेल चलता रहता है। यदि प्रबंधन वास्तव में ईमानदार है, तो उसे अपने कैंपस से करोड़ों की इस लूट को तत्काल रोकना होगा।
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