
बालाघाट, मध्य प्रदेश: बालाघाट में हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाली महिला नक्सली सुनीता (Sunita) का बदला हुआ रूप और उसके चेहरे की मुस्कान अब नरक से स्वर्ग में आने की कहानी बयां कर रही है। चार साल तक नक्सली संगठन में रही सुनीता की पुरानी स्थिति, जिसमें उसकी चाल, चप्पल और कमजोर चमक साफ़ बताती है कि उसे भरपेट मनचाहा भोजन भी नसीब नहीं हुआ होगा। वह बड़े नक्सली नेता की गार्ड ड्यूटी में रहती थी, जहाँ जीवन कठोर और अनिश्चित था।

39 लाख रुपये और सम्मान का जीवन

सुनीता ने मध्य प्रदेश सरकार और पुलिस पर भरोसा करके आत्मसमर्पण किया है। सरकार की समर्पण व पुनर्वास नीति के तहत अब उसे एक सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन मिलेगा, जिसकी कीमत अनमोल है। साथ ही, उसे बड़ा आर्थिक लाभ भी दिया जा रहा है:
राइफल जमा करने के लिए: ₹3.5 लाख
उसके ऊपर उद्घोषित इनाम की राशि: ₹14 लाख
मकान बनाने के लिए: ₹1.5 लाख
जमीन/व्यवसाय शुरू करने के लिए: ₹20 लाख
कुल आर्थिक सहायता: ₹39 लाख
नक्सलियों से अपील: हथियार छोड़ो, कलम उठाओ
पुलिस और सरकार ने जंगल में घूम रहे अन्य नक्सलियों से भी अपील की है कि वे हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करें। मध्य प्रदेश सरकार की उदार समर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत उन्हें भी सुनीता की तरह आर्थिक लाभ और समाज में परिवार के साथ एक अच्छा जीवन जीने का मौका मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि अब देश में संविधान लागू है, इसलिए हथियार छोड़कर कलम से लड़ने की आदत डालनी चाहिए।
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