
संवाददाता: नरेश विश्वकर्मा निरसा (धनबाद): चापापुर कोलियरी में हाइवा की चपेट में आने से हुई मिथुन कुंभकार की मौत का मामला अब गरमाता जा रहा है। तीन दिन बीत जाने के बाद भी मृतक के परिजनों को न्याय न मिलने से आक्रोशित ग्रामीणों और विभिन्न राजनीतिक दलों ने ओसीपी (OCP) का कामकाज पूरी तरह ठप कर दिया है।

मैनेजमेंट के ‘अड़ियल’ रवैये पर भड़के नेता

धरना स्थल पर मौजूद पूर्व मंत्री सह भाजपा नेत्री अपर्णा सेनगुप्ता ने प्रबंधन पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, “मैनेजमेंट एक गरीब की जान की कीमत ऐसे लगा रहा है जैसे किसी वस्तु की डाक (नीलामी) हो रही हो। कभी 20 हजार, कभी 50 हजार तो कभी 1 लाख की बोली लगाई जा रही है। यह अपमानजनक है।” उन्होंने याद दिलाया कि इसी कोलियरी में पूर्व में हुई एक दुर्घटना में 12 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया था, तो अब भेदभाव क्यों?
‘धैर्य का बांध अब टूट रहा है’
माले नेता सह विधायक प्रतिनिधि अमित मुखर्जी ने भी प्रबंधन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि तीन दिनों से गरीब परिवार न्याय के लिए सड़क पर बैठा है, लेकिन प्रबंधन सुनने को तैयार नहीं है। स्थानीय विधायक के न पहुँचने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायक जी सरकारी कार्य से राँची में हैं और वे उनके प्रतिनिधि के तौर पर यहाँ डटे हुए हैं।
प्रमुख मांगें और चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक 12 लाख रुपये मुआवजा, नियोजन और कोलियरी क्षेत्र की सड़कों की सुरक्षा (लाइटिंग और मरम्मत) सुनिश्चित नहीं होती, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। सड़क सुरक्षा को लेकर पहले भी पत्राचार किया गया था, लेकिन प्रबंधन की लापरवाही ने आज एक और जान ले ली।
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