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झारखंड में सत्ताधारी दल के नेता की नृशंस हत्या: कानून-व्यवस्था पर गहराता संकट और सदन में छिड़ा सियासी संग्राम

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Feb 21, 2026

 

​झारखंड के गिरिडीह जिले से आई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। गिरिडीह जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष और झारखंड मुक्ति मोर्चा के कद्दावर नेता राकेश महतो की नृशंस हत्या ने न केवल प्रशासनिक तंत्र की विफलता को उजागर किया है, बल्कि सत्ता के गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है।

 

खांखी जंगल में राकेश महतो का अधजला शव मिलने की खबर जैसे ही फैली, पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। अपराधियों ने न केवल इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया, बल्कि साक्ष्य मिटाने की नीयत से शव को पेड़ों के पत्तों के ढेर में जलाकर पहचान मिटाने का भी क्रूर प्रयास किया। यह घटना इसलिए भी अधिक चिंताजनक है क्योंकि जिस दल की सरकार राज्य की कमान संभाल रही है, उसी दल का एक रसूखदार नेता सुरक्षित नहीं रह सका।

 

​इस हत्याकांड की गूंज अब झारखंड विधानसभा के सदन तक पहुंच चुकी है, जहां पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष की ओर से आजसू विधायक निर्मल महतो ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए सीधा सवाल दागा कि यदि प्रदेश में सत्ता पक्ष के दिग्गज नेता ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता अपनी सुरक्षा की उम्मीद किससे करे? विपक्ष का आरोप है कि राज्य में अपराधी बेखौफ हो चुके हैं और पुलिस का इकबाल पूरी तरह खत्म हो गया है। दूसरी ओर, सरकार की तरफ से मोर्चा संभालते हुए गिरिडीह के विधायक और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने सदन को भरोसा दिलाया कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पुलिस अपराधियों की धरपकड़ के लिए निरंतर छापेमारी कर रही है।

 

हालांकि, सरकार के आश्वासनों के बावजूद जनता और राजनीतिक हल्कों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। एक प्रभावी जननेता की इस तरह जंगल में हत्या होना और शव को जलाने का प्रयास करना यह संकेत देता है कि राज्य में अपराधियों का दुस्साहस चरम पर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन कितनी तत्परता से इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझा पाता है और क्या वाकई झारखंड में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाया जा सकेगा।


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