
झरिया: कोयलांचल की धरती आज नारी शक्ति के जयघोष और कड़े प्रतिरोध की गवाह बनी। महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और उनके राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के संकल्प के साथ झरिया में एक विशाल आक्रोश मार्च का आयोजन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन में क्षेत्र की सैकड़ों महिलाओं ने सड़कों पर उतरकर यह साफ कर दिया कि अब वे अपने हक और हिस्सेदारी के लिए किसी भी बाधा को स्वीकार नहीं करेंगी।

आक्रोश मार्च की शुरुआत स्थानीय चिल्ड्रेन पार्क से हुई, जो झरिया के 4 नंबर स्टैंड तक जाकर संपन्न हुआ। हाथों में तख्तियां और झंडे लिए महिलाओं का हुजूम देखते ही बन रहा था। इस मार्च का मुख्य उद्देश्य नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पुरजोर समर्थन करना और महिलाओं के सशक्तिकरण की राह में रोड़ा अटकाने वाली ताकतों को कड़ा जवाब देना था। पूरे रास्ते महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का संदेश देती नजर आईं।

प्रदर्शन के दौरान महिलाओं का आक्रोश चरम पर दिखा। मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विरोध के प्रतीक स्वरूप प्रदर्शनकारियों ने विपक्षी नेताओं का पुतला दहन भी किया। महिलाओं का आरोप था कि जब भी महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो विपक्ष द्वारा उसमें अड़चनें पैदा की जाती हैं, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कार्यक्रम का नेतृत्व कर रही झरिया विधायक रागिनी सिंह ने जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्षी दलों पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की आधी आबादी को 33 प्रतिशत आरक्षण देकर उन्हें मुख्यधारा में लाने का एक ऐतिहासिक प्रयास है। रागिनी सिंह ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन का इस विधेयक के प्रति नकारात्मक रवैया उनकी महिला विरोधी मानसिकता को उजागर करता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जो दल महिलाओं के राजनीतिक उत्थान का विरोध कर रहे हैं, वे किस मुंह से नारी सम्मान की बात करते हैं। विधायक ने अपने संबोधन में आगे कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में लाए गए इस अधिनियम से महिलाएं न केवल सामाजिक बल्कि राजनीतिक रूप से भी निर्णय लेने वाली भूमिका में आएंगी। मार्च में शामिल महिलाओं ने एक स्वर में कहा कि वे अब जागरूक हो चुकी हैं और अपने सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वाली किसी भी विचारधारा को सफल नहीं होने देंगी।
झरिया का यह आक्रोश मार्च केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक बड़े आंदोलन की आहट के रूप में देखा जा रहा है। आयोजकों और स्थानीय महिला प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि यदि महिलाओं के अधिकारों की अनदेखी की गई या उनके सशक्तिकरण में बाधा पहुंचाई गई, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा। झरिया की सड़कों पर आज जो एकजुटता दिखी, उसने पूरे क्षेत्र में एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश प्रसारित कर दिया है।
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